शिक्षक

शिक्षा संस्कार को करता मुखरित,

शिक्षक देते इसका ज्ञान।

गुरु समान ना कोई दूजा,

वंदन करो ,करो प्रणाम।


गीली माटी से बाल मन को,

अद्भुत सांचे में देते ढाल।

सुदृढ़ बनाते अध्येता को,

जीवन पथ का दीप्त भाल।


इनकी संगत में मूढ़ भी,

हो जाता है महान।

विद्या की ज्योत जलाकर,

करते जग का कल्याण।


भविष्य की नींव है ये,

मानवता की हैं मिशाल।

भाईचारा हमें सिखाकर

बनाते हॄदय विशाल।


गुरु मोक्ष का द्वार 

ईश्वर से बड़ा इनका स्थान,

करो गुरु का मान

हर सपना होगा साकार।


बिन गुरु के जीवन

जैसे दिशाहीन इक नदी,

मार्ग प्रशस्ता बन गुरु राह दिखाते,

भटक जाओ मंज़िल से यदि।

                 

रीमा सिन्हा

लखनऊ-उत्तर प्रदेश