गैरी पुत्र गणेश

विघ्न हरण,मंगलकरण,

गौरी पुत्र गणेश।

करो कृपा हम पर ऐसी,

मिटे सकल क्लेश।

प्रथम पूज्य प्रभु आप हैं,

करिए पूरे काज।

गौरवान्वित मैं हो सकूं,

जग जाएं मेरे भाग।

मन हर्षित है,तन पुलकित है,

प्रभु दर्शन से आज।

सेवा मन से कर सकूं,

मेरे सवांरो काज।

रिद्धि- सिद्धिके साथ प्रभु,

पधारो मेरे गेह।

धन्य-धन्य मैं हो जाऊं,

बरसे परम स्नेह।

हे! करुणामय,जगपति,

जगवन्दन, लम्बोदर महराज।

एक सहारा बस आपका,

और न दूजो नाथ।


अनुपम चतुर्वेदी, सन्त कबीर नगर