स्त्रियों के यात्रा वृतांत...

इतिहास सदैव ही नकारता रहा

स्त्रियों द्वारा लिखित

यात्रा वृतांत ,


क्योंकि वह भली-भांति जानता है

कि जिन वृक्षों के नीचे उसने गीत गाए

वहीं से जन्मीं नई सभ्यताएं ,


जहां भी वह ठहरी

वहीं ठौर परिवर्तित हुई

तीर्थस्थलों में ,


जहां भी उसने दर्द साझे

वहीं से निरंतर बह रही हैं नदियां

आंसुओ को थामें

समुंद्रों की तलाश में ,


और सुनों

जहां भी उसके कदम ठिठके

या वो घिरी रही अंतर्द्वंदों में ,

या देखती रही मुड़-मुडकर

पीछे ही ,

..वहां आज भी हिल रही है धरती

बार-बार !!


नमिता गुप्ता "मनसी"

उत्तर प्रदेश , मेरठ