शिक्षक की अभिलाषा

बुनियादी शिक्षा का उदेश्य,

रज मात्र भी पूर्ण कर पाऊँ मैं।

कच्ची ईंटों से महल बनाऊं,

डूबती कश्तियों को 

पार लगाऊं मैं।

घनी अन्धेरी दीवारों पर,

गर रोशनी भर पाऊँ मैं।

सपना देखें उनको पूरा करें,

इसका मार्ग दिखाऊं मैं।

नन्हें -मुन्हें परिंदों को,

क्षितिज में उड़ना सिखाऊँ मैं।

फिर गुरु शिष्य परम्परा का ,

उचित निर्वहन कर पाऊँ मैं ।

जाति धर्म में ना बटना ,

गर ये शिक्षा दे पाऊँ मैं।

अज्ञानता को दूर कर,

एक श्रेष्ठ शिक्षक बन पाऊँ मैं।

प्राथमिक विद्यालय के प्रति 

आमजन की धारणा को,

परिवर्तित करके दिखाऊँ मैं।

मानवता का प्रेषक बन,

एक शिक्षक का 

दायित्व निभाऊँ मैं।


वन्दना पांडेय,वरिष्ठ कवयित्री व 

शिक्षिका,स्वतंत्र लेखिका व स्तम्भकार,

गोरखपुर