खत

नीला आसमान

चमकते सितारे

महकते पुष्पगुच्छ

खिलती कलियांँ

उड़ते भ्रमर

हिमआच्छादित

गिरिशिखर

कलकल निनाद

करती नदियां

वाणी सुरताल

आनंदमय जीवन

हे ईश! यह आपने

सब ख़त में लिख

भेजा है हमारे नाम

फिर पता नहीं

यह संसार इनका

मान क्यों नहीं करता

एक अजीब सी

तृष्णा में जीवन बिताता है

किसी और

ख़त की इंतजार में।


वीनू शर्मा,वरिष्ठ कवयित्री 

व कथाकार,जयपुर-राजस्थान