अब पहले जैसी बात नहीं शिक्षा क्षेत्र मे

शिक्षा क्षेत्र मे समयानुसार निरंतर परिवर्तन हुआ जा रहा है अब पहले जैसी बात नहीं रही पहले मात्र किताब से ही शिक्षा ग्रहण की जाती थी आज शिक्षा के इतने अधिक आधुनिक तरीके उपलब्ध हो चुकेहैं की कोई भी घर बैठै ही शिक्षा प्राप्त कर सकताहै। एक बड़ा परिवर्तन ये भी हुआ है की शिक्षा को आज शिक्षा देना कम और आर्थिक लाभ अधिक कमाने का तरीका बनाते जा रहे हैं। शिक्षा आवश्यक है जिसके चलते अआर्थिक कमी के मजबूरी के चलते बहुत से लोग शिक्षा से वंचित भी रह जाते हैं।हमारी सरकार को ही कोई ठोस कदम उठाते हुए बढ़ती फीस दरों के खिलाफ कोई कदम उठाने चाहिए ताकी हर किसी को जो शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है उस अधिकार से कोई आर्थिक कारणों के चलते वंचित नहीं रह पाऐ। शिक्षा ही तो है जो नैतिक मूल्यों को पढ़ाती अर्थव्यवस्था समझाती समाज मे उठने बैठने के काबिल बनाती बेहतरीन सोच कर जाती फिर इन सभी के इज़ाफ़े के लिये पक्षपात नहीं होना चाहिए किसी के साथ भी सिर्फ आर्थिक तंगी के कारण उच्च शिक्षा भुगतान देने मे अस्मर्थ किसी काबिलियत को आगे आने से रोका जाना एक पाप समान ही तो है गुरुओं को भी योगदान देते हुए अपने असीम़ ज्ञान के भंडार मे से कुछ ज्ञान सेवा के तौर पर काबलियत को समाज से मिलाने के लिये खर्च करना चाहिए ताकी कोई उस मुकाम को पा ले जो देश के गौरव मे चार-चांद लगा सके।

वीना आडवानी तन्वी

नागपुर, महाराष्ट्र