"माॅं है शीतल छाया"

(1)--

जिंदगी कड़ी धूप सी, 

माॅं है शीतल छाया।

हारने लगी जब भी जीवन में,

दे हौसला जीवन जंग जिताया।

मुश्किल है नामुमकिन नहीं ,

गुढ़ मंत्र बतलाया ।

जिंदगी कड़ी धूप सी,

 माॅं है शीतल छाया।

(2)--

संघर्षों से जूझते जूझते 

जब भीआंसू आया 

हंसी दे अपने लबों की ,

आंखों से आंसू चुराया।

जिंदगी कड़ी धूप सी,

 माॅं है शीतल छाया।

(3)--

सही -गलत ,ऊंच-नीच ,

जीवन का पाठ पढ़ाया ।

संस्कारों से सींच कर जीवन,

 कर्म पथ पर आगे बढ़ाया।

जिंदगी कड़ी धूप सी,

माॅं है शीतल छाया ।

(4)--

संगमरमर की मूरत तेरी ,

सबसे अलग तेरी काया ।

व्यथित हृदय भले हो तेरा,

मुस्कान अधर पर  पाया।

जिंदगी कड़ी धूप सी ,

 माॅं है शीतल छाया

(5)----

मां की ममता के खातिर

 ईश्वर भी मनुज रूप में आया

आंचल की  छाया के आगे

 स्वर्ग को है विसराया।

जिंदगी कड़ी धूप सी ,

मां है  शीतल छाया ।


मधुलिका राय, "मल्लिका"  

गाजीपुर (उत्तरप्रदेश)