चुनाव..

पता नहीं क्यों

कुछ डरने सी लगी हूं अब

किसी एक रंग पर उंगली रखने से ,

किसी एक का

चुनाव करना

हमेशा ही श्रेयस्कर कहां होता है ,

कुछ तो छूटता ही है न !!

इसीलिए

मैं नहीं चुनना चाहती

कोई एक रंग

लाल..हरा..नीला..पीला या काला..

मैं होना चाहती हूं

इंद्रधनुष

ताकि बांध सकूं

एक सतरंगी पुल

पृथ्वी के इस छोर से

उस छोर तक ,

इस तरह

मैं आसान कर देना चाहती हूं

सभी रास्ते

हमारे आवागमन के !!


नमिता गुप्ता "मनसी"

उत्तर प्रदेश, मेरठ