थाली

मानसी ने अमर से कहा, "दिल बहुत घबरा रहा, समय करीब आ रहा और पूरा शहर बंद है।"

"मत परेशान हो डिअर, मैं लेडी डॉक्टर से बात करता हूं।"

थोड़ी देर बाद ही अमर ने मानसी से कहा, "सुनो, कुछ जरूरी सामान लेकर तैयार हो जाओ, डॉक्टर का कहना है, उनको ले आइये, अब एडमिट हो जाना चाहिए, तभी मैं पूरा ध्यान रख पाऊंगी।"

और कार अस्पताल की तरफ दौड़ने लगी, रास्ते मे प्रत्येक चौराहे पर कार ने लाठी खाई, फिर कहीं डॉक्टर की पर्ची दिखाने पर ही पुलिस वाले माने, कहीं पर गाँधीजी ने पार लगाया। बड़े मुश्किलों से पांच किलोमीटर का रास्ता पार किया।

डॉक्टर ने पंहुचते ही एक अल्टीमेटम दिया, "आप वापस जाइये, सिर्फ मानसी अस्पताल में रहेगी।"

अब मानसी जोर से रोने लगी, डॉक्टर प्लीज इनको रहने दीजिए, और अस्पताल ने इजाजत नही दी, अमर से पेपर में साइन भी ले लिया कि डॉक्टर जो सही समझे वो करे।

शाम तक अजीब ऊहापोह में थी मानसी, 4 बजे उसकी तबियत अधिक बिगड़ गयी, आपरेशन थिएटर में ले जाया गया, फ़ोन पर अमर को खबर कर दी गयी, पर आने की इजाजत नही थी।

बाइस मार्च की शाम 5 बजे उस दिन पूरे भारत मे लोगो ने थाली और ताली बजाई !!!!

पता नही, कोरोना वॉरियर्स के लिए या मानसी के यहां लक्ष्मी के पदार्पण के लिए !!!!


स्वरचित

भगवती सक्सेना गौड़

बैंगलोर