आज के युवा पीढ़ी

हम बात करने जा रहे हैं आज ,आज के युवा पीढ़ी के बारे में ।मैं एक सोशल वर्कर हूँ ,एक लेखिका हूँ, एक गृहिणी, एक माँ, एक पत्नी, इन सब किरदारों के बीच मेरा एक अहम् किरदार मैं आज की नारी हूँ ।

देश-प्रदेश में चल रहीं घटनाऐ ना हमसे छुपी है ना आपसे, फिर भी मूक हम आज के युवा हैं, जहाँ तक मेरी सोच हैं, देश को बिगाड़ने, और देश को सुधारना हमारे देश के युवाओं के ऊपर ही निर्भर करता है ।

फिर भी अपने कर्तव्यो से मुंह मोड़ते आज के युवा पीढ़ी ।

आज कल के नेटवर्किंग, जैसे चीजों में मोबाइल, टीवी लेप टाॅप,कम्प्यूटर, जैसे अपना आधे से ज्यादा समय ऐसे ख़फा देते हैं मानों कोई महान काम करके आ रहें हो ।आज के युवाओं में देश की जिम्मेदारीयो का होना बहुत जरूरी है। देश में बदलाव के लिए आज के युवाओं में देशप्रेम होना बहुत जरूरी है जो कि आजकल के युवाओं में बहुत कम दिखाई देता है ।फिर भी देश में चल रहें छोटे से बड़े गतिविधियों का ध्यान रखना होगा ।देश प्रेम के चलतें ही आज के युवा देश की तरक्की कर पायेंगे ।देश प्रेम दिखाने के लिए युवाओं को राजनीति में रुचि दिखाना  होगा ।

एक तरफ से देखा जाए तो आज देश की बागडोर वृध्द लोगों के हाथ में है बहुत कम ही युवा राजनीति में सक्रिय हैं ।देश में युवाओं को एक अच्छा नागरिक भी बनना चाहिए ।देश की जिम्मेदारीओ को भी भली भांति निभाना चाहिए ।जैसे-वोट डालना,देश को स्वच्छ रखना । समय पर टैक्स भरना, घूस ना लेना, ना देना,आदि को समझना चाहिए ।एक अच्छा नागरिक वही हैं जो खुद जिम्मेदार बनें ।

और दूसरों को इसके लिए प्रेरित करे।अक्सर देखा गया है कि आजकल के युवाओं में जिम्मेदारी जैसी कोई चीज नहीं होती हैं ।

फिर भी उन्हें समझना होगा की वो अपने आनें वाली पीढ़ी को क्या शिक्षा देने वाले हैं ।

युवाओं में परिवार के प्रति जिम्मेदारी होना उतना ही अहम् हैं जितना देश के प्रति जिम्मेदार होना ।अगर एक तरीके से देखा जाए आजकल के युवा पीढ़ी भटक गए हैं,कई बार सेल्फिस भी   हो जाते हैं ।कुछ लोग तो बस अपने मे ही मस्त रहते हैं ।माँ-बाप परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझते ही नहीं है ।युवा ही हैं जो परिवार के खंभे होते हैं ।

जो उसे अपना सब कुछ दांव पर लगा खड़ा करतें हैं वे अगर जिम्मेदार नहीं बनें तो परिवार को बिखरने में समय नहीं लगता।और जब तक परिवार विकास नहीं करेगा ।देश कभी विकास नहीं कर पायेगा ।कुछ ऐसे भी युवा होते हैं जो सिर्फ काम को ही तवज्जों देते हैं ।परिवार को नहीं माँ-बाप के प्रति कोई जिम्मेदारी नहीं समझते और उन्हे वृध्दाश्रम 

मे छोड़ देते हैं ।माँ-बाप के प्रति जिम्मेदारीयो से कभी नहीं भागना चाहिए ।काम के अलावा पूरे परिवार के साथ समय बिताना चाहिए ।आज कल के युवा पीढ़ी कई बार गलत फैसले, गलत निर्णय लेकर पछताती है।आज कल के युवाओं को समाजिक भी होना चाहिये ।समाज हमारे लिए बनाया गया है, समाज की गतिविधियों में भाग लेना चाहिए ।

समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारीयो को समझना चाहिए 

लेकिन कभी भी समाज की बातों में आकर गलत निर्णय नहीं लेना चाहिए ।लोग क्या कहेंगे, समाज क्या कहेगा, यही सोच सोचकर कई बार इन्सान गलत निर्णय ले लेता है ।जिससे नुकसान समाज़ का नहीं, आपका होता हैं ।

युवावस्था मे एक जोश एक उत्साह होता हैं । उसके बातों में जोर और चेहरे में चमक होता हैं ।

वो जो अवस्था होती हैं वो कुछ कर गुजरने की अवस्था होती हैं ।

हिंसा के मायाजाल में उलझकर युवा अपने को गलत राह पर ले जा सकते हैं ।जोश और उत्साह का ये मतलब नहीं कि हिंसा ही की जाऐ ।हिंसा पर भी काबू पाया जा सकता है बशर्ते अपने मन को 

नियंत्रण रखा जाए ।

अगर युवा बात बात पर हिंसा करने के  बजाय अपने जोश,उत्साह, और गर्मजोशी को 

सकारात्मक कार्य पर लगाए । ना केवल समाज़ के हित का कार्य करेंगे बल्कि अपने हित का भी कार्य करेंगे ।


निर्मला सिन्हा ग्राम जामरी डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़