गुरु शिष्य

गुरु शिष्य का रिश्ता है

प्रेम भाव से निभता है,

गुरु ज्ञान रत्नों का भंडार है

देकर शिष्य को,

दिलवाता समाज में

प्रतिष्ठा मान-सम्मान है।

शिष्य गुरु चरणों में

जब झुकता है ,

तभी तो उसको

ज्ञान अमृत फल मिलता है।

आओ,

गुरुओं का मान करें

मिलकर दिल से

उनका सम्मान करें।


राजीव डोगरा 'विमल'

कांगड़ा हिमाचल प्रदेश

rajivdogra1@gmail.com