शिक्षा और डिग्री

शिक्षा और डिग्री 

वैसे तो हैं दो शब्द,

पर भ्रमित कर‌ देते हैं कभी - कभी

कहीं एक ही शब्द के पर्याय से लगते हैं

तो कहीं ज़मीन - आसमान का अंतर समेटे से दिखते हैं।

सरल, सभ्य और सुसंस्कृत बनाती है शिक्षा

पर डिग्री का होना कभी हमें अभिमानी,

जीवन को सफल बनाने की पूंजी है शिक्षा

जबकि बस - दाल रोटी कमाने का माध्यम है डिग्री।

फिर भी विडम्बना तो देखिए

होड़ मची है आज डिग्री पाने की,

गम नहीं है अंदर की इंसानियत खोने की।

कभी सोचा है आपने!

क्या सही मायने में 

आज हम हो रहे हैं शिक्षित?

जवाब मिलेगा आपको

नहीं, नहीं और सिर्फ नहीं।

क्योंकि आज हमारा सपना है

डॉक्टर और इंजीनियर बनने का

सच्चा और शिक्षित इंसान बनना,

लक्ष्य नहीं किसी का।

डिग्री हम जरुर लें

मैं विरोध नहीं कर रही हूं इसका,

पर याद रहे, यह डिग्री हो

सेवाभाव, नम्रता और जीवन की सरलता।

जागृत होती है इसी से आत्मा

क्योंकि इन गुणों के अभाव में

कागज़ की डिग्री तो बस

है एक कोरा कागज़ और एकमात्र है सपना ।


(नीलू गुप्ता, सिलीगुड़ी, पश्चिम बंगाल)