आचार्य नरेन्द्र देव की परम्परा के वाहक यूपी के पूर्व चिकित्सा मन्त्री श्री ओमप्रकाश श्रीवास्तव नहीं रहे

आचार्य नरेन्द्र देव की परम्परा के राजनीतिज्ञ, राष्ट्रपुरुष चन्द्रशेखर के अभिन्न मित्र श्री ओमप्रकाश श्रीवास्तव अब शारीरिक रूप से हम लोगों के बीच नहीं रहे। प्रजा समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक श्री ओमप्रकाश श्रीवास्तव 1974 में कांग्रेस से जौनपुर शहर से विधायक चुने गए थे। उस समय श्री चन्द्रशेखर युवा तुर्क के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हो चुके थे और ओमप्रकाश श्रीवास्तव उन लोगों में थे, जो यूपी में चन्द्रशेखर के खास माने जाते थे।

श्री चन्द्रशेखर  कांग्रेस के उन नेताओं में थे जो श्रीमती इंदिरा गाँधी की मर्जी का विरोध कर कांग्रेस कार्यसमिति में चुने गए थे। वह दौर था, जब दलों में भी लोकतन्त्र था।

जब लोकनायक जयप्रकाश नारायण और प्रधानमन्त्री श्रीमती इंदिरा गाँधी में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को लेकर तकरार बढ़ा, स्थिति आमने सामने की हो गई, तब भी श्री चन्द्रशेखर जयप्रकाश नारायण को ही सही मानते रहे। 26 जून को भोर में जब जेपी की गिरफ्तारी हुई, श्री चन्द्रशेखर तुरन्त थाने पहुँचे। उन्हें वहीं गिरफ्तार कर लिया गया।

श्री ओमप्रकाश श्रीवास्तव को इस गिरफ्तारी की सूचना मिली और वह बेखौफ   दिल्ली पहुँचे। जेल में जाकर श्री चन्द्रशेखर से भेंट की और कांग्रेस में रहकर कांग्रेस के आपातकाल के खिलाफ हो गए।

1977 में श्री ओमप्रकाश श्रीवास्तव को जौनपुर शहर से जनता पार्टी का प्रत्याशी बनाया गया और वह जौनपुर शहर से दुबारा विधायक चुने गए। 

श्री ओमप्रकाश श्रीवास्तव विधान परिषद के भी सदस्य रहे। वह माननीय श्री मुलायम सिंह यादव की सरकार में सूबे के चिकित्सा मन्त्री रहे, लेकिन इसे लेकर उनके भीतर रंच मात्र अहंकार नहीं था। वह विनय, विचार और सादगी के पर्याय थे। उनका नहीं रहना विनय, विचार और सादगी को पसंद करने वालों को बहुत खलेगा। खासतौर से नेता प्रतिपक्ष माननीय श्री रामगोविंद चौधरी, विधान परिषद सदस्य माननीय श्री यशवंत सिंह, पूर्व मंत्री लोकतन्त्र सेनानी कुँअर सुरेश सिंह, पूर्व मन्त्री माननीय श्री ओमप्रकाश सिंह, लोकतन्त्र सेनानी श्री निर्मल सिंह, सूर्य कुमार सिंह और श्यामजी त्रिपाठी आदि को।

इस आदि में मैं भी हूँ और चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के विभागाध्यक्ष डाक्टर सानन्द कुमार सिंह, लोकनायक जयप्रकाश नारायण ट्रस्ट, लखनऊ के अध्यक्ष श्री अनिल त्रिपाठी, समाजवादी पार्टी केराकत, जौनपुर के डाक्टर दिलीप कुमार और अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के प्रदेश अध्यक्ष डाक्टर इन्द्रसेन श्रीवास्तव भी। कुछ वर्षों पूर्व बाबू पद्माकर लाल के नहीं होने की सूचना मिली थी। उस समय लगा था कि लखनऊ में कोई अपना संरक्षक नहीं रहा।

श्री ओमप्रकाश श्रीवास्तव को देखकर संतोष होता था कि कोई है। आज वह भी नहीं रहे। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे। उनके परिजनों को, समर्थकों को यह दुःसह दुख सहने की शक्ति दे।

- धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव