क्या सच है

ड्रग्स दो -ड्रग्स दो कहने वाली मीडिया अब कहाँ।

ड्रग्स का धंधा भी तो धंधा है -आपदा में अवसर।

नशे की खेप,महंत करते आत्महत्या  -हे राम

अनिल त्रिपाठी