संसार के पहले इंजीनियर और शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा की हुई पूजा बंटा प्रसाद

जखनियां। गाजीपुर। दुनियां के पहले इंजीनियर और वास्तुकार भगवान विश्वकर्मा की जयंती शुक्रवार को आस्था और विश्वास के साथ मनाई गई।जगह जगह भगवान् विश्वकर्मा की प्रतिमा पाण्डालो में स्थापित कर   कथा पूजन कर प्रसाद वितरण एवं भजन कीर्तन का आयोजन किया गया। भक्तों के भक्ति के मस्ती का नजारा देखते ही बन रहा था। विविध वाद्ययंत्रो के बीच मस्ती में  भगवान् विश्वकर्मा के चरित्र गायन के साथ  नृत्य लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र था।लौह निर्मित उपकरणों सामग्रियों के साथ अश्त्र शस्त्र की  विधि विधान से पूजा कर भगवान विश्वकर्मा को याद किया गया।  शुक्रवार को  परिवर्तिनी एकादशी के चलते श्रद्धालु भक्त व्रत उपवास भी किए। मान्यता है की इस एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु सोते हुए करवट लेते हैं। विश्वकर्मा पुराण के अनुसार आदि नारायण ने सर्वप्रथम ब्रह्माजी और फिर विश्वकर्मा जी की रचना की। भगवान विश्वकर्मा को संसार का पहला इंजीनियर और वास्तुकार माना जाता है। मान्यता है कि इन्होंने ब्रह्माजी के साथ मिलकर इस सृष्टि का निर्माण किया था। विश्वकर्मा पूजा के दिन विशेष तौर पर औजारों, निर्माण कार्य से जुड़ी मशीनों, दुकानों, कारखानों आदि की पूजा की जाती है। इसके साथ ही साथ विश्वकर्मा जी को यंत्रों का देवता भी माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान विश्वकर्मा ने ही देवताओं के लिए विविध अस्त्र शस्त्रों का निर्माण किया था। पुराणों में एक कथा वर्णित है कि भगवान विश्वकर्मा ने अपनी पुत्री संज्ञा का विवाह सूर्य देव के साथ किया था।जो सूर्य के प्रचंड ताप को सहन नहीं कर पाई और सूर्य से बिना बताए अपनी छाया छोड़ कर  अपने पिता के घर चली आई।जिसके चलते विश्वकर्मा भगवान ने अपने‌ चाक पर चढ़ाकर सूर्य देव के तीक्ष्ण ताप को कम दिया। तथा काटे गए ताप से कई शक्ति शाली हथियारों का निर्माण किया। जैसे यमराज का कालदंड,कुबेर की शाबिका, विष्णु की गदा,,शिव का त्रिशूल, आदि।इसके साथ ही सात पुरियों का भी निर्माण किया जिसमें स्वर्गलोक, मृत्यु लोक, द्वारिका पुरी, सुदामा पुरी,शिव के त्रिशूल पर काशी पुरी का निर्माण लंकापुरीऔर हस्तिनापुर आदि शामिल हैं।इसी तरह  सरस्वती का वीणा भगवान श्रीकृष्ण की बांसुरी, आदि का भी वर्णन मिलता है।

  ऐसी मान्यता है कि विश्वकर्मा जयंती पर भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से कारोबार में वृद्धि होती है। धन-धान्य और सुख-समृद्धि के लिए भगवान विश्वकर्मा की पूजा मंगलदायी है। भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा के लिए आवश्यक सामग्री जैसे अक्षत, फूल, चंदन, धूप, अगरबत्ती, दही, रोली, सुपारी,रक्षा सूत्र, मिठा फल आदि की प्रधानता होती है ।