गण नायक हे गज वदन

करिये हम पर भी कृपा, ओ गौरी के लाल।

सूँड़ घुमाकर दीजिये, मोदक इधर उछाल।

मोदक इधर उछाल, हमें भी मोदक प्यारे।

कुछ तो करें विचार, सदा से भक्त तुम्हारे।

कह 'कोमल' कविराय, सभी बाधाएं हरिये।

कृपा दृष्टि कल्याण, गजानन सब पर करिये।


गण नायक हे गज वदन, मंगल मूर्ति गणेश।

संकट बधाएं हरो, हरो अमंगल क्लेश।

हरो अमंगल क्लेश, कष्ट जीवन के हरिए।

सत्य, न्याय, अनुराग, प्रेम से झोली भरिए।

कह 'कोमल' कविराय, सदा सुख शांति प्रदायक।

रिद्धि सिद्धि शुभ लाभ, प्रदाता हे गण नायक।


श्याम सुन्दर श्रीवास्तव 'कोमल'

अशोक उ०मा०विद्यालय, लहार

भिण्ड, म०प्र०