मेरे अंदर का बावर्ची

मेरे अंदर का बावर्ची 

जब-जब जाग जाता।।

यू-टयूब का दरवाजा

सदैव खटखटाता।।


बस यू-टयूब बाबा को मनाता

बता कुछ नया जो मुझे न आता।।

बता यू-टयूब नया मुझे सिखाता

मेरा कीचन मेरी हसी उड़ाता।।


एक डिश के लिये बर्तनों का

ढ़ेर मुझे खूब चिढ़ाता।।

गैस भी कभी तेज,कभी धीमी

आंच पे नाचता जाता।।


बनी नयी यू-टयूब से सीख 

जब नयी व्यंजन।।

बली का बकरा बन मेरा 

परिवार मुंह चढ़ा के खाता।।


झूठी तारीफ कर मेरा दिल

परिवार जीत ही जाता।।

ऐसे ही मेरे भीतर का बावर्ची जैसे

युद्ध जीत पताका लहरा मुस्काता।।


वीना आडवानी तन्वी

नागपुर, महाराष्ट्र