आओ पकौड़े बेचें



देश का जी. डी. पी. बढ़ाने के लिए आदमी को अपना योगदान देना चाहिए l भले ही कोई भी काम हो  l हमें उसे करने में  कोई गुरेज नहीं करना चाहिए l कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता  l और काम से आदमी की पहचान नहीं होती l तो जो आज के पढ़े लिखे एम. बी. ए. -बी. टेक. किये युवक/  युवतियाँ हों या  प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवा l सबको कोई ना कोई रोजगार करना चाहिए l चाहे, जलेबी समोसा बेच लो l चाहे फल बेच लो  l या चाय ही बेच लो  l बेचना भी एक कला है  l  इसको सीखने की जरूरत होती है l मतलब ये कि जो चीज मुनाफा ना दे रही हो उसको बेच देना चाहिए l  कुछ लोग सपने भी बेच दे रहे हैं l  इसको सीखे बगैर आप जीवण की वैतरणी पार  नहीं  कर सकते l भले ही आपके पिताजी ने  आपको बी. टेक. या एम.  टेक. तक पहुँचाते - पहुंँचाते  खुद कोट पैंट से लुंँगी और गमछे में आ गये   हों l भले ही  उन्होंने अपना मकान बच्चों को पढ़ाने और किसी लायक बनाने के लिए बेच दिया हो  l या कहीं गिरवी रख दिया हो  l उन्होंने ये सोचकर अपने बच्चों को पढ़ाया कि  बच्चे पढ़ लिखकर धीरे धीरे सेट हो जायेंगे l और आगे चलकर उनके गरीबी के दिन खत्म हो  जायेंगे l और जीवन का अंतिम समय बड़ा  ही सुखद बितेगा  l 

बच्चे आजीवन किताबों के बोझ से लदे रहे l और ढ़िबरी और इनवर्टर की रौशनी में अपनी आँखें फोड़ते रहे कि चलो अब सेटल होने का समय हो गया है   l किताबों के बोझ से राहत मिलेगी l लेकिन, सरकार ने पकौड़े बेचने को भी बढ़िया काम मानते हुए ये मुनादी की है कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता  l असल काम है पैसे कमाना l इसे आप ए. सी. कमरों में दूसरों  के लिए पुल - पुलिया, बांँघ बनाने में  व्यर्थ में  नष्ट ना करें l दूसरों के बेहतर भविष्य और रोडमैप के बारे में सोचना आपका काम नहीं  है  l बल्कि ये काम सरकार का है l  तो सरकार का ये काम है कि  कौन एम. बी. ए

 . करके फल बेचेगा और कौन बी. टेक. करने के बाद समोसे  और कचौरी और कौन दसवीं पास करके मंत्री  या विधायक बनेगा तो कृपया सरकार की आज्ञा की अवहेलना ना करें  l और पकोड़े  तलकर बेचें l  कभी - कभी युवा सोचते हैं  कि जब पकौड़े ही तलने थें तो बी. टेक. - एम. बी. ए. क्यों किया..? और, जब बी. टेक. और एम. बी. ए. कर ही लिया है पकौड़े क्यों बेचें ? तो आपको सपने बेचने का हुनर सीख लेना चाहिए l  कल को आपको भी सपने ही बेचने हैं l  
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महेश कुमार केशरी