पराली को जलाएं नहीं, जैविक खाद बनाएं

बांदा। जिले की 71 न्याय पंचायतों में बुधवार को एक साथ इनसीटू योजना के अंतर्गत पराली प्रबंधन व जागरुकता गोष्ठी हुई। किसानों को पराली जलाने से जलवायु व मानव स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान बताए गए। किसानों को इसके प्रबंधन की जानकारी दी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर डीएम आनंद कुमार सिंह ने जिले में पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी के लिए एडीएम की अध्यक्षता में एक सेल का गठन किया है। तहसील स्तर पर एसडीएम की अध्यक्षता में सेल का गठन किया गया। सेल द्वारा पराली जलाने की घटनाओं को रोकने और मौके पर विधिक कार्रवाई की जाएगी। ग्राम पंचायत स्तर पर लेखपालों एवं ग्राम प्रधानों को पराली जलाने की घटना होने पर सीधे जिम्मेदार बनाया गया है। तिंदवारी ब्लाक में न्याय पंचायत पलरा के प्राथमिक विद्यालय (बिछवाही) में फसल अवशेष प्रबंधन गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिला कृषि अधिकारी डा. प्रमोद कुमार ने किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में बताया। कहा कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण के साथ मिट्टी के पोषक तत्व नष्ट होते हैं। उत्पादन में गिरावट आती है। पशुओं के चारे की कमी हो जाती है। उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी संतोष कुमार ने कहा कि किसान उन्नतिशील कृषि यंत्रों की मदद से पराली को छोटे-छोटे टुकड़ों में करके उसे सड़ाएं और जैविक खाद बनाएं। तकनीकी सहायक शारदा प्रसाद, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि जगपत, सचिव, कृषि विभाग के कर्मचारी आदि मौजूद रहे।