अहिंसा परमो धर्मः एक अर्ध सत्य

आर्यावर्त की धरती पर अहिंसा परमो धर्मः गाया जाता है।

 केशव के इस पूर्ण श्लोक को अधूरा सिखाया जाता है ll 


 अगर चरखा और तकली से मिल सकती थी आजादी।

 तो फिर नेताजी को आजाद फौज की जरूरत ही क्यों पड़ी ll 


 चंद्र शेखर खुदीराम और भगत सिंह को क्यों होना पड़ा शहीद ।

आजादी तो हासिल हम कर सकते थे बिना किसी को हुए सहीद ll 


 कश्मीर से कश्मीरी पंडित को क्यों होना पड़ा विस्थापित।

 उन्होंने भी तो ध्यान में रखा अहिंसा हीं है सर्वोपरि ll


 कुछ उदाहरण 


रानी लक्ष्मीबाई अगर अहिंसा परमो धर्म को गाती।

 तो क्या रणचंडी बनकर गोरे का संहार कर पाती ll 


 अगर वीर कुंवर और मंगल पांडे इसी पाठ को गाते रहते ।

 तो क्या बे फिर  इतिहास पुरुष  बन पाते ??


 राणा प्रताप का वह भाला और घोड़ा इसी मंत्र को गाता ।

तो क्या हुआ आज राणा के साथ अमर हो पाता ??


 याद करो वह कुरुक्षेत्र जहाँ केशव ने गीता का ज्ञान दिया ।

 पार्थ के गांडीव में फिर अपने शब्दों से  जान भरा ।। 


 कुछ प्रश्न 


अगर अहिंसा परमो धर्म है तो ।

राम को क्यों धनुष धारण करना पड़ा?

 रावण जैसे आताताई का संहार क्यों करना पड़ा ??


 क्या ज्ञानी परशुराम को इस पाठ को पढ़कर धनुष उठाने की जरूरत थी?

 क्या उनके पास गांधी जैसे दो गालों की कमी थी ??


 इन सभी महापुरुषों में पुरुषार्थ की कमी न थी।

 और अहिंसा परमो धर्म के साथ इस मंत्र की अगली छंद भी याद थी ll 


 मैं भी कहता हूं अहिंसा परमो धर्म है।

 लेकिन यह तब जब धर्म हिंसा तथैव च ll3


 धर्म की हानि कर हम अहिंसा का पाठ कैसे पढ़ सकते हैं।

 हम तो बस मधुसूदन के इस पूर्ण मंत्र को अमल करते हैं ll3


 अहिंसा परमो धर्मः धर्म हिंसा तथैव च llll 3


श्री कमलेश झा

राजधानी दिल्ली