एक एंकर की मौत

हर रोज मौतों की खबर दिखाने वाला एक बहुत बड़े न्यूज एंकर की मौत हो गयी। एंकर की मौत बहुतों के लिए ताज्बुब कराने वाली खबर थी। कइयों ने मान लिया था कि यह जिस तरह से मौतों की खबरें दिखाता है, उस हिसाब से इसकी मौत तो नहीं हो सकती। हो न हो अमृत पीकर आया है। अब भाग्य का लिखा और सृष्टि-विनाश के खेल से कौन बच सकता है। सो इसकी भी मौत हो गयी। मीडिया उसके जन्म से लेकर मृत्यु तक की तस्वीरों का कोलॉज बना बाप-बार तारीफों का पुल बाँधते नहीं थक रहा था। कोई कहता – नए आयाम स्थापित किए हैं तो कोई कहता मील का पत्थर है। वैसे एक बात तो माननी होगी जब तक वह जिंदा था तब तक अच्छे-अच्छों की सिट्टी-पिट्टी गुल कर देता था। जिस तरह खबरों की चीड़-फाड़ करता था, उस हिसाब से उसे एंकर नहीं पोस्टमार्टम करने वाला डॉक्टर होना चाहिए था। उसका सामना करना मानो यमराज का सामना करना था। वह क्या है न पुलिस और कोर्ट दोषी को जब सजा दें तब दें, लेकिन मीडिया अपना डंडा और फंदा साथ लेकर चलता है। इनके कोर्ट-कचहरी में फैसला सुनाना चट मंगनी पट ब्याह की तरह होता है।

देह के अवसान से गुजरते हुए एंकर साहब चीफ जस्टीस ऑफ यमलोक पहुँचे। वहाँ यमराज भैंसे पर सवार हाथ में यमपाश लिए गंभीर मुद्रा में दिखायी दे। एंकर यह सब देखकर अचंभित रह गया। वह तुरंत बोल उठा – मुझे पता नहीं आप कौन हैं? लेकिन आप पर एक ब्रेकिंग न्यूज़ बना सकता हूँ – जानवरों पर जुल्म करता हैवान। हैशटैग नाशकरो शैतान। अभी मैं यह न्यूज चलाता हूँ देखिए किस तरह मेनका गांधी आपको सलाखों के पीछे करती हैं। यमराज का पारा सातवें आसमान पर चढ़ा और बोले – बेवकूफ मेनका तो क्या उर्वशी, रंभा भी आ जाएँ तो वे मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकतीं। ज्यादा से ज्यादा दो ठुमके लगाकर मेरी सुरा के गिलास में मधुपेय भरकर जायेंगी। एंकर यह सब सुन थरथराने लगा था। अब पिक्चर क्लियर हो गई थी। सामने साक्षात यमराज और बाएँ चित्रगुप्त अपनी मूँछों पर ताव दे रहे थे।

यमराज ने चित्रगुप्त से कहा – इससे पहले कि और कुछ ब्रेकिंग न्यूज बनाए इसके कर्मों का हिसाब अपने सूपरसेवर डेटाबेस निकालकर इसी की स्टाइल में इसके थोपड़े पर दे मारो। चित्रगुप्त ने अपने सेंसरस्क्रीन इन्फिनिटी अडवांस्ड वाले डेटाबेस टूल से एंकर साहब के काले चिट्ठे निकालते हुए बोले – महाराज! दिखने में है यह भोला! पल में बदले अपना चोला! कभी किसानों को आतंकी तो कभी अमरूद को बताए गोला! सत्ता के गलियारे में खाता है यह भटूरा-छोला! हरी गुलाबी नोटों से जीपीएस का राज है खोला, लोगों को उल्लू बनाने लेकर निकला है यह झोला। लालच देखकर मन है डोला, यही तो है आस्तिन का सपोला।

यमराज एंकर के काले चिट्ठे सुन बोले – फेकू बाबा – फेंकू बाबा! खबरें झूठ बोले बाबा! जब भी बोले कुछ भी बोले, दूर-दूर की फेंके बाबा! छोटी-छोटी खबरों को, मुर्गमुसल्लम बोले बाबा! गरम तेल में इन्हें डुबाओ, फिर खबर न बोलें बाबा!

फिर कुछ रुककर बोले - चक दे फट्टे, नप दे गिल्ली..सुबह जालंधर, शाम को दिल्ली...बहुत दिनों के बाद है आया, कोई एंकर हमारी गल्ली।

इतना सुनना था कि एंकर महाराज पछाड़ खाकर धड़ाम से गिर पड़े।

डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा उरतृप्त, मो. नं. 73 8657 8657