धरती का सबसे धैर्यवान प्राणी मनुष्य ही है

ध्रुवीय भालू को शीत निद्रा से पहले लंबी खुराक लेनी पड़ती है l ताकि, वो अपने शरीर में जमा किये गये भोजन को चिरकाल की अवधि तक संरक्षित रखकर लंबे शीतकालीन अवधि  को पार कर सके  l इसलिए ध्रुवीय भालूओं की खुराक बहुत बड़ी होती l इसलिए वो लंबी खुराक लेकर शीत निद्रा में चले जाते  हैं  l ऊँट रेगिस्तानी जानवर है l वो सैंकड़ों लीटर पानी अपने देह में सुरक्षित रख लेता है l ताकि, रेगिस्तान में जब सफर लंबा हो , तो वो अपनी प्यास बुझा सके l मनुष्य इस दुनियाँ में सबसे अधैर्यवान प्राणी है  l वो कर्म करने के तुरंत बाद फल की इच्छा करता है l स्वाभाविक भी है l   लेकिन, इसके विपरीत कुछ मनुष्य बहुत धैर्यवान होतें हैं l  उनको नौ की जगह अट्ठारह घंटे काम करवा लो वो उफ तक ना करेंगे  l  

वैसे तो मनुष्य की खाल बहुत पतली  होती है  l लेकिन, इधर एक शोध से  पता चला है कि उसकी खाल कुछके दशकों में बहुत मोटी हो गई है l इस तरह जो सदियों पहले  का इंसान  था l जिसकी चमड़ी बहुत पतली हुआ करती थी  l कालांतर में मनुष्य जब आदिमानव से होमोसेपियंस  ( ज्ञानी मानव) बना l तब कालक्रम के विस्तार में धीरे-धीरे मनुष्य की खाल मोटी होती गई  l और  उसकी सहने की शक्ति भी बढ़ती गई l कालक्रम में मार्क्स और लेनिन ने कई क्राँतियाँ भी की l लेकिन इंसान के खाल पर जूँ तक ना रेंगीं l आज पचास हजार भी कमाओ तो महीने के अंत में कर्ज लेने की आवश्यकता आन पड़ती है  l लेकिन, ये जो ठेका मजदूर हैं l जैसे सफाई कर्मचारी, शिक्षा मित्र और भी अनुबंध आधारित लोग जिन्हें,  छह छह - महीने और साल-  साल  भर तक वेतन नहीं मिलता l फिर, भी ये लोग हमारे देश के पुनर्निर्माण में अपना अभूतपूर्व योगदान लगातार देते जातें हैं l और लगातार काम करते जातें हैं l अब, सोचिये इन बेचारों की खाल कितनी मोटी हो गई है l जो अनुबंध पर चार- पाँच हजार रूपये महीने  में महीनों खटतें हैं l  कैसे ये अपने बच्चों की फीस भरते होंगे ? कैसे राशन खरीदते होंगे  ? कैसे घर का किराया देते होंगे ? एक राष्ट्रीय पुरस्कार इनकी सहनशीलता के लिए भी इनको भी  दिया जाना चाहिए  l  दूसरा पुरस्कार उन बनियों, मकान -मालिकों, स्कूल के शिक्षकों को भी दिया जाना चाहिए l जो इनके बच्चों को अपने स्कूलों में पढ़ने देतें हैं l


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महेश कुमार केशरी