हिमाचल सरकार ने लिया फैसला, प्रदेश में उगाया गया गेहूं और चावल डिपुओं में मिलेगा सस्ता

हिमाचल प्रदेश के 19 लाख राशनकार्ड उपभोक्ताओं को प्रदेश में उगाया गया गेहूं और चावल डिपुओं में सस्ता मिलेगा। सरकार अब प्रदेश के किसानों से गेहूं और धान की सीधी खरीद करेगी। इसके बाद गेहूं की पिसाई और धान की थ्रेसिंग कर डिपुओं में उपभोक्ताओं को सस्ती दर पर राशन उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार किसानों से 19.50 रुपये प्रतिकिलो धान की खरीद अक्तूबर से शुरू कर देगी। प्रदेश में इस समय 3 लाख मीट्रिक टन धान और गेहूं की पैदावार हो रही है। डिपो में इस समय 5 लाख मीट्रिक टन गेहूं और चावल की आवश्यकता है। ऐसे में किसान ज्यादा से ज्यादा गेहूं और धान की पैदावार करें, ताकि उन्हें अच्छे दाम मिलें। इससे किसानों की आय दोगुना होगी।

फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया अभी पंजाब, हरियाणा से गेहूं और चावल खरीदता है। इसके बाद इसे सब्सिडी पर हिमाचल प्रदेश को देता है। उपभोक्ताओं को आटा देने के लिए प्रदेश सरकार गेहूं की पिसाई करती है। राशन डिपुओं में अभी उपभोक्ताओं को करीब 9 रुपये किलो आटा और 10 रुपये किलो चावल दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि बाहरी राज्यों से हिमाचल प्रदेश में आने वाली गाड़ी का किराया और लोड-अनलोड का खर्च बचेगा। प्रदेश में मंडी, कांगड़ा, हमीरपुर, ऊना, सिरमौर और बिलासपुर में सबसे ज्यादा गेहूं और धान होता है। 

हिमाचल में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत उपभोक्ताओं को 12 किलो आटा और 7 किलो चावल मिल रहा है। इसके अलावा तीन दालें (दाल चना, माश और मलका) दो लीटर तेल (रिफाइंड और सरसों) चीनी और एक  किलो नमक दिया जा रहा है।