पुल के टूटकर जलमग्न होने से करीब एक लाख की आबादी प्रभावित, जिम्मेदार बने मूकदर्शक

कर्नलगंज  /गोंडा। तहसील क्षेत्र कर्नलगंज अन्तर्गत कटरा बाजार के बालपुर पतिसा मार्ग पर मौजा सोनहरा भरसड़ा सम्पर्क पुल लगभग दो माह से जलमग्न होकर टूट गया है जिससे करीब एक लाख की आबादी प्रभावित है। पुल के ऊपर गड्ढे हो गए हैं जिससे कई बार हादसा भी हो चुका है। परन्तु जिम्मेदार प्रशासनिक एवं विभागीय अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों का ध्यान इस तरफ नहीं जा रहा है। उक्त ग्रामों के निवासी ग्रामीणों माया देवी का कहना है कि उक्त पुल बीते करीब दो वर्षों से टूटा है। क्षेत्रीय विधायक भी आ चुके हैं लेकिन समस्या का हल नहीं निकला जिससे रात बिरात जरूरत पड़ने पर एंबुलेंस नहीं आ सकती है। अनंत राम का कहना है कि पुल की ऐसी हालत दो वर्षों से है लेकिन प्रशासन और क्षेत्र के जिम्मेदार लोगों द्वारा केवल यह कहकर आश्वासन दिया जाता है कि पानी सूखने के बाद पुल बनेगा लेकिन उसके बाद भी नतीजा ढाक के तीन पात रहता है। मनोज कुमार का कहना है कि बाढ़ की समस्या से पुल टूटकर पानी में डूबा हुआ है। विधायक जी भी मौके पर आ चुके हैं उनके द्वारा भी कहा जा चुका है कि पुल पास हो चुका है और बन जायेगा लेकिन दो वर्षों बाद भी अभी तक पुल नहीं बना। राजू कश्यप का कहना है कि उक्त पुल के टूटने की समस्या को दो वर्ष हो चुके हैं। मौजूदा विधायक भी दो बार आये हैं जिन्हें पानी में ले जाकर दिखाया गया है जो पैजामा बटोर कर पानी में उतर कर देख चुके हैं लेकिन आज तक यह पुल नहीं बना। बताया जाता है कि यहां कुछ दिनों पहले भरसड़ा गांव का एक लड़का भी पानी में डूबकर मर गया था। जिसके बावजूद जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा उक्त समस्या को गंभीरता से संज्ञान में नहीं लिया गया और कोई मदद नहीं मिल रही है। बदहाली का आलम यह है कि यहां बल्ली लगी है जिसमें कोई ईंट,पत्थर भी नहीं डलवाया गया है जबकि बड़े बड़े गड्ढे हैं जिनमें यदि पानी सूखने पर दो तीन ट्राली ईंट,पत्थर पड़ जाये तो ग्रामीणों एवं राहगीरों को कुछ राहत मिल सकती है। वहीं उक्त गंभीर समस्या से त्रस्त ग्रामीणों का कहना है कि जिम्मेदार लोगों के पानी सूखने के बाद पुल बनवाने के आश्वासन के बाद बरसात के बाद पानी भी सूख जाने पर दो वर्षों में यही स्थिति बरकरार रहती है। उक्त विकराल समस्या के चलते और पुल ना बनने से गांवो में यदि किसी की तबीयत खराब हो जाये व रात्रि में हालत गड़बड़ हो तो चौपहिया वाहन, एंबुलेंस भी आने जाने का कोई रास्ता नहीं है। यही नहीं झगड़ा लड़ाई होने पर सरकार द्वारा चलाई जा रही 112 पुलिस सहायता भी नहीं मिल पाती है। जिससे किसी तरह पैदल आने जाने के अलावा चौपहिया वाहनों के आवागमन हेतु कोई सुविधा अभी तक मुहैया ना होने से बदहाली का दंश झेल रहे ग्रामीण एक अदद पुल के शीघ्र निर्माण होने और समस्या से छुटकारा मिलने की आस लगाए हुए बाट जोह रहे हैं जिनका कोई पुरसाहाल नहीं है।जो क्षेत्र के जिम्मेदार लोगों, अधिकारियों कर्मचारियों की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा रहा है और समूचे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर रहा है। ऐसे में अब यह पुल आगामी चुनाव में मुद्दा भी बन सकता है और नेताओं को जनता के सवालों और आक्रोश का सामना भी करना पड़ सकता है।