सकारात्मकता

नकारात्मकता जब

मन में बस जाती है

बड़ी ही विकट

परिस्थिति हो जाती है

नकारात्मकता इतनी

गहरी हो जाती है

अपनी छाया

सबमें ही फैलाती है

जैसे स्वच्छ जल हो गया हो गंदा

बुरे जाल में फंस जाता है वह वंदा

रोक देती है वह

हर सुबह उजाला देखने से

रोकती है वह

चमकते तारों का उजाला देखने से

उसका काम तो

अंधेरा फैलाना है

और अपनी जड़ें

मन में फैलाना है

नकारात्मक को

समूल मिटाना चाहिए

उजाले की जरूरत है

उजाला फैलाना चाहिए

जैसे स्वच्छ जल

पीना जरूरी है

उसी तरह मन को

स्वच्छ रखना जरूरी है

सकारात्मक जब

मन में फैली होगी

नकारात्मकता को

नहीं जगह मिलेगी

सकारात्मकता मजबूती देती है

आगे बढ़ने की यह प्रेरणा देती है

सकारात्मकता पथ प्रदर्शक है हमारी

सकारात्मकता एक हथियार है हमारी सकारात्मकता सफलता की कुंजी है सकारात्मकता बहुत ही जरूरी है

सकारात्मकता वह प्रकाश है

जिससे बनती जीवन की आस है

नकारात्मकता का  घर

न बसने पाए

जैसे ही यह दिखे

इस को जड़ से मिटाएं

सकारात्मक विचार जब आते हैं

हम ईश्वर से भी मिल पाते हैं

होती है ईश्वर से बात हमारी

जब होती है अपने

बड़ों से बात हमारी

आओ सकारात्मकता को

हम मन में बसाएं

दृढ़ निश्चय से हम

इसका स्वागत कर पाएं

सकरतमाकता जब होती है

मानव की जय जय होती है

रितु शर्मा

दिल्ली