क्या अमिताभ ठाकुर के आईपीएस पद के दुरुपयोग से नूतन ठाकुर को मिलते थे एलआईयू रिपोर्ट जैसे परम गोपनीय दस्तावेज: उर्वशी

लखनऊ। बलात्कार पीड़िता को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर को हाल ही में गिरफ्तार करके जेल भेजा गया है.यूपी की राजधानी लखनऊ के थाना हजरतगंज में दर्ज एक आपराधिक मामले में गिरफ्तारी के समय खुद को समाजसेवी दंपत्ति कहने वाले पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर और नूतन ठाकुर ने पुलिस टीम को डराया,धमकाया,मारपीट की और गिरफ्तारी का इतना विरोध किया कि पुलिस को अमिताभ और नूतन के खिलाफ गोमतीनगर थाने में आपराधिक मामला तक दर्ज कराना पड़ा. अमिताभ की गिरफ्तारी के मामले के अमिताभ के घर, थाना हजरतगंज और हॉस्पिटल के जितने भी वीडिओ और फोटो सामने आये हैं, लगभग सभी में अमिताभ मीडिया की उपस्थिति में हिंसक चेहरा बनाकर पुलिस पर झूंठे आरोप लगाते हुए चीखने-चिल्लाने का ड्रामा करके पुलिस प्रशासन को अर्दव में लेने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं। जरा सोचिये, जो आईपीएस रिटायर होने के बाद ऑन-ड्यूटी पुलिस अधिकारियों के साथ हिंसक होकर निहायत ही जोर-जोर से चीखते-चिल्लाते हुए झूंठे आरोप लगाते हुए उन्हें धमकी दे सकता है वह जब ड्यूटी पर होगा तो अपने पद का रौब गालिब कर कितना ज्यादा बेजा काम कराता होगा। अमिताभ पर दर्ज एफआईआर में एक आरोप बलात्कार मामले में सीओ की गोपनीय रिपोर्ट प्राप्त करने का है जिसमें कहा गया है कि अमिताभ ने रेप के आरोपी सांसद के साथ आपराधिक साजिश करके यह रिपोर्ट अवैधानिक रूप से प्राप्त करके सोशल मीडिया और मीडिया में प्रचारित-प्रसारित करके बलात्कार पीडिता को बदनाम किया . इससे मिलती-जुलती चौंकाने वाली एक बात लखनऊ से सामने आई है. जब अमिताभ आईपीएस पद पर थे तो इनकी पत्नी नूतन ठाकुर को स्प्न् रिपोर्ट जैसे संवेदनशील पेपर भी आसानी से मिल जाते थे। इस मामले को लखनऊ की समाजसेविका और आरटीआई कार्यकत्री उर्वशी शर्मा सामने लाई हैं. उर्वशी ने बताया कि नूतन ठाकुर ने लखनऊ पुलिस को दिए एक सशपथ बयान में कहा था कि रामपुर में तैनात रहे एलआईयू इंस्पेक्टर नेत्रपाल सिंह द्वारा तत्कालीन एसपी रामपुर को दी गई एक गोपनीय आख्या नूतन को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुरादाबाद कार्यालय ने आरटीआई में दी थी। बकौल उर्वशी जब उन्होंने इस सम्बन्ध में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुरादाबाद  को शिकायत भेजी तो वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुरादाबाद ने इस शिकायत की जांच के बाद आख्या में लिखा है कि प्रकरण का सम्बन्ध जनपद रामपुर से है शिकायत का निस्तारण कर दिया जिससे साफ हो गया कि है वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुरादाबाद के कार्यालय ने एलआईयू रिपोर्ट नूतन ठाकुर को नहीं दी थी। उर्वशी बताती हैं कि इस सम्बन्ध में जब उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रामपुर को शिकायत भेजकर एलआईयू इंस्पेक्टर नेत्रपाल सिंह की रिपोर्ट नूतन ठाकुर को उनके जिले रामपुर से दिए जाने अथवा न दिए जाने की जांच कराने का अनुरोध किया तो इस शिकायत पर जांच के बाद स्थानीय अभिसूचना इकाई रामपुर के निरीक्षक ने पत्र में स्पष्टतया अंकित किया कि तत्कालीन एलआईयू इंस्पेक्टर नेत्रपाल सिंह द्वारा पुलिस अधीक्षक रामपुर को दी गई गोपनीय आख्या की प्रति स्थानीय अभिसूचना इकाई रामपुर के कार्यालय से नूतन ठाकुर को उपलब्ध नहीं कराई गई और शिकायत को निस्तारित कर दिया जिससे  साफ-साफ सामने आ रहा है कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रामपुर ने भी प्रश्नगत एलआईयू रिपोर्ट नूतन ठाकुर को नहीं दी। ऐसे में यह सबाल उठना तो लाजिमी है कि तो क्या अमिताभ ठाकुर के आईपीएस पद के दुरुपयोग से नूतन ठाकुर को एलआईयू रिपोर्ट जैसे परम गोपनीय दस्तावेज मिलते थे और बाद में उनको आरटीआई से पाने की झूंठी बात ठाकुर दंपत्ति द्वारा बोल दी जाती थी। उर्वशी का कहना है कि इस प्रश्न का उत्तर एलआईयू रिपोर्ट लीक मामले की जांच से ही मिलेगा इसीलिये उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ से सार्वजनिक रूप से मांग की है कि एलआईयू रिपोर्ट लीक के इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।