सहारनपुर मंडल की 10 चीनी मिलों पर पिछले वर्ष का अभी भी 1144 करोड रुपए गन्ना भुगतान बकायाः भगत सिंह वर्मा

भाजपा की प्रदेश सरकार गन्ने का लाभकारी रेट 600प्रति कुंटल तत्काल घोषित करेंः वर्मा

सहारनपुर। पश्चिम प्रदेश मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगत सिंह वर्मा ने कहा कि सहारनपुर मंडल की 10 चीनी मिलों पर पिछले वर्ष का गन्ना भुगतान 1144 करोड रुपए अभी भी बकाया है और पिछले वर्षों में देरी से किए गए गन्ना भुगतान पर लगा ब्याज मंडल की 17 चीनी मिलों पर 1500 करोड़ रुपए बकाया हो गया है।
 पेपर मिल रोड पश्चिम प्रदेश मुक्ति मोर्चा के कार्यालय पर बैठक को संबोधित करते हुए भगत सिंह वर्मा ने कहा कि प्रदेश के गन्ना मंत्री सुरेश राणा की थाना भवन बजाज चीनी मिल पर सबसे अधिक गन्ना भुगतान 212 करोड रुपए बकाया है। इसके बाद जिले की बजाज चीनी मिल गंगनौली पर भी 165 करोड रुपए गन्ना भुगतान बकाया है। जिले की 5 चीनी मिलों पर पिछले वर्ष का अभी भी 345 करोड रुपए गन्ना भुगतान व 500 करोड़ रुपए ब्याज बकाया है। जिसमें बजाज चीनी मिल गांगनौली पर 165 करोड रुपए नानौता सहकारी चीनी मिल पर 73 करोड रुपए सरसावा सहकारी चीनी मिल पर घ्45 करोड़ रुपए व दया चीनी मिल गागलहेड़ी पर 42 करोड़ रुपए गन्ना भुगतान अभी भी बकाया है। मेहनतकश व कर्जबंद गन्ना किसानों को भाजपा की योगी सरकार गन्ना भुगतान व ब्याज दिलाने के लिए गंभीर नहीं है। गन्ना भुगतान न होने से गन्ना किसान भारी आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहे हैं और एक एक रुपए को मोहताज हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष भगत सिंह वर्मा ने कहा कि भारत सरकार के शुगर कंट्रोल ऑर्डर 1966 के अनुसार जो चीनी मिलें गन्ना किसानों को 14 दिन के अंदर भुगतान नहीं करती हैं उन्हें 15 प्रतिशत वार्षिक दर से गन्ना किसानों को ब्याज का भुगतान करना चाहिए और बकाया ब्याज वाली चीनी मिलों को गन्ना किसानों से ढुलाई का किराया काटने का अधिकार नहीं है, लेकिन सरकारों की ढुलमुल नीति के कारण चीनी मिल मालिक लगातार गन्ना किसानों का शोषण कर रहे हैं पूरे गन्ना सीजन चीनी मिल मालिक कांटों में भारी घटतौली करते हैं उसके बावजूद भी गन्ना किसानों को समय से भुगतान नहीं करते हैं जो गन्ना किसानों के साथ सरासर अन्याय है और इसके लिए प्रदेश व केंद्र सरकार सीधे-सीधे जिम्मेदार हैं। भगत सिंह वर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश की 120 चीनी मिलों पर अभी भी पिछले वर्ष का 7000 करोड रुपए गन्ना भुगतान व पिछले वर्षों में देरी से किए गए गन्ना भुगतान पर लगा ब्याज 10000 करोड रुपए बकाया है जिससे प्रदेश सरकार तत्काल गन्ना किसानों को दिलाएं। जिस दिन उत्तर प्रदेश की चीनी मिलें गन्ना किसानों को ब्याज का भुगतान करना शुरू कर देंगी उस दिन कोई भी चीनी मिल 14 दिन से अधिक गन्ना किसानों का भुगतान नहीं रोक पाएंगी।
भगत सिंह वर्मा ने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद व माननीय उच्चतम न्यायालय दिल्ली द्वारा चीनी मिलों को देरी से किए गए गन्ना भुगतान पर लगे ब्याज को गन्ना किसानों को भुगतान करने के आदेश पहले से ही किए हुए हैं जिसका सरकार पालन नहीं करा रही है। भगत सिंह वर्मा ने कहा कि एक ओर  सरकार चीनी मिलों से गन्ना किसानों को समय से गन्ना भुगतान नहीं करा रही है दुसरे भाजपा की योगी सरकार ने पिछले 4 वर्ष से गन्ने का 1प्रति कुंतल भी रेट नहीं बढ़ाया है जबकि पड़ोसी छोटे राज्य हरियाणा ने पिछले 4 वर्ष में गन्ने का घ्50 कुंटल रेट बढ़ाया है इसलिए उत्तर प्रदेश की सरकार प्रदेश के गन्ना किसानों को 50 कुंटल का भुगतान सरकारी राजस्व खाते से सीधा गन्ना किसानों के बैंक खातों को भेजें और आगामी गन्ना सीजन के लिए प्रदेश सरकार गन्ने का लाभकारी रेट 600 रूपये प्रति कुंटल तत्काल घोषित करें ताकि प्रदेश के गन्ना किसानों पर बढ़ते हुए कर्ज को कम किया जा सके और गन्ने की खेती को लाभकारी बनाए जा सके। भगत सिंह वर्मा ने कहा कि हमारे पास फार्मूला है जिसके तहत हम उत्तर प्रदेश सहित सभी प्रदेशों के गन्ना किसानों को आसानी से नकद 600 रूपये प्रति कुंतल गन्ने का रेट दिला सकते हैं। वीरेंद्र चौधरी ने कहा कि भाजपा की प्रदेश सरकार को गन्ना किसानों की उपेक्षा काफी महंगी पड़ेगी। बैठक का संचालन करते हुए मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव रविंद्र चौधरी गुर्जर ने कहा कि उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों की क्रय शक्ति बढ़ने से ही प्रदेश आर्थिक रूप से मजबूत हो सकता है और गन्ना किसानों की समस्या हल करके ही परदेस में राज किया जा सकता है। जिसे भाजपा की योगी सरकार को समझ लेना चाहिए। बैठक में सरदार गुलविंदर सिंह, बंटी विनोद सैनी, वीरेंद्र सिंह, बिल्लू नवीन कुमार, अमित कुमार, सुमित वर्मा, नीरज सैनी, प्रधान रविंद्र चौधरी, प्रधान सुधीर चौधरी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य अरविंद चौधरी, डॉक्टर यशपाल त्यागी, हाजी साजिद, मोहम्मद राशिद, मोहम्मद यासीन, महबूब हसन, मोहम्मद इस्लाम, जनेश्वर प्रधान त्यागी, प्रवीण त्यागी, नैन सिंह सैनी, मांगेराम सैनी, चौधरी बाबूराम, नीरपाल सिंह गुर्जर एवं ऋषि पाल गुर्जर आदि ने भाग लिया।