"माँ भारती के होनहार बेटे नीरज चोपड़ा को सौ सलाम"

आज भारत के एक सपूत ने ऑलिंपिक में गोल्ड मेडल जीतकर पूरे विश्व में अपना परचम लहरा कर माँ भारती को गौरव दिलाया है। हर भारतीय गर्व से गरदन ऊँची करके बड़ी शान से नीरज के गुणगान गा रहे है।

भाला फेंक एथलीट नीरज चोपड़ा ने बुधवार को टोक्यो ऑलिंपिक में परफेक्ट जैवलिन थ्रो कर फाइनल में अपनी जगह बनाई और ट्रैक एंड फील्ड में ऑलिंपिक का पहला गोल्ड मेडल दिलाने के लिए अपनी दावेदारी को प्रस्तुत किया। नीरज चोपड़ा 86.65 मीटर की कोशिश के साथ क्वालिफिकेशन में टॉप पर रहते हुए ओलंपिक फाइनल में अपनी पोजीशन बनाने वाले पहले इंडियन जैवलिन प्लेयर बने। जिसके कारण नीरज चोपड़ा से देश को Gold Medal की आस जगी थी जो नीरज ने पूरी की।

भाला फेंक एथलीट नीरज चोपड़ा का जन्म सन 1997 में 24 दिसंबर को भारत देश के हरियाणा राज्य के पानीपत शहर में हुआ था। नीरज चोपड़ा के पिता का नाम सतीश कुमार है और इनकी माता का नाम सरोज देवी है। 

पुत्र के लक्षण पालने में ही दिख गए थे, नीरज ने सिर्फ 11 साल की उम्र में ही भाला फेंकना प्रारंभ कर दिया था। 

शुरुआत में नीरज का वजन 80 किलो था। ऐसे में नीरज चोपड़ा ने जैवलिन थ्रो में अपना हाथ अजमाने के लिए महज दो महीने में 20 किलो वजन कम कर लिया।

वजन कम करने के बाद नीरज चोपड़ा के सामने समस्या थी भाला खरीदने की। दरअसल उस समय एक अच्छी क्वालिटी की जैवलिन एक लाख रुपए से भी ज्यादा की आती थी, जोकि उनके परिवार के लिए खरीदना मुश्किल था। ऐसे में नीरज चोपड़ा ने 6-7 हजार रुपए की जेवलिन खरीदी और उससे प्रैक्टिस करने लगे। इसके बाद नीरज चोपड़ा ने दिन में 7-7 घंटे तक जैवलिन थ्रो की प्रैक्टिस की। इस तरह नीरज एक बेहतरीन जेवलिन थ्रो खिलाड़ी बने।

नीरज चोपड़ा ने अपनी ट्रेनिंग को और भी ज्यादा मजबूत बनाने के लिए साल 2016 में एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया जो इनके लिए काफी फायदेमंद साबित हुआ। नीरज चोपड़ा ने साल 2014 में अपने लिए एक भाला खरीदा था, जो ₹7000 का था। इसके बाद इंटरनेशनल लेवल पर खेलने के लिए ₹1,00000 का भाला खरीदा था। नीरज चोपड़ा ने साल 2017 में एशियाई चैंपियनशिप में 50.23 मीटर की दूरी तक भाला फेंक कर मैच को जीता था। इसी साल उन्होंने आईएएएफ डायमंड लीग इवेंट में भी हिस्सा लिया था, जिसमें वह सातवें स्थान पर रहे थे। इसके बाद नीरज चोपड़ा ने अपने कोच के साथ काफी कठिन ट्रेनिंग चालू की और उसके बाद इन्होंने नए-नए कीर्तिमान स्थापित किए। ऑलिंपिक में भाला फेंकने का 3 ट्रायल दिया जाता है उस में से सबसे बेस्ट वाले को कंसीडर किया जाता है लेकिन नीरज चोपड़ा ने पहले ही ट्राय में में 86.65 मीटर दूर तक जैवलिन थ्रो किया और फिर अगला प्रयास नहीं करने का निर्णय लिया और इस तरह से उन्होंने पहले ही प्रयास में ऑलिंपिक फाइनल में सिर्फ अपनी जगह ही नही बनाई बल्कि फाइनल जित कर  भारत के लिए गोल्ड मेडल भी जीत लिया। इनके भाला फेंक में बेहतरीन प्रदर्शन करने के कारण उन्हें आर्मी में भी शामिल किया गया है।

नीरज चोपड़ा ने गोल्ड मेडल दिवंगत मिल्खा सिंह को समर्पित किया है। उन्होंने कहा, 'मुझे अपना बेस्ट देना था, लेकिन गोल्ड मेडल के बारे में मैंने नहीं सोचा था। मैं मिल्खा सिंह के लिए मेडल जितना चाहता था। मिल्खा सिंह का सपना था कि कोई भारतीय ट्रैक और फील्ड में ऑलिंपिक पदक जीते।

नीरज चोपड़ा के गौरव की बात करें तो, नीरज बहुत सारे पदक से सम्मानित है जैसे की,

राष्ट्रीय जूनियर चैंपियनशिप गोल्ड मेडल, राष्ट्रीय युवा चैंपियनशिप रजत पदक,

तीसरा विश्व जूनियर अवार्ड, एशियाई जूनियर चैंपियनशिप रजत पदक, एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप गोल्ड मेडल, एशियाई खेल चैंपियनशिप स्वर्ण गौरव और 2018 में अर्जुन पुरस्कार।

आज हर किसीकी ज़ुबाँ पर नीरज चोपड़ा के ही चर्चे है। भारत माँ के ऐसे होनहार बेटे को सौ सलाम।

(भावना ठाकर, बेंगुलूरु) #भावु