दियना

दियना घर घर जलइयो ,

सब जन ज्ञान के लिये।

शिक्षा ज्योति जलाइयो,

शिक्षक सफल तब कहइयो।

साक्षर देश को बनइयो,

भईया मान के लिये।

दियना घर.....

शिक्षक द्रोण जैसे बनना,

शिष्य अर्जुन जैसे गढ़ना।

एकलव्य राह तुम्हरी देखे,

भाषा न्याय की वो सीखे।

सच्ची राह तुम दिखाना,

जन गण गान के लिये ।

दियना घर........

शिक्षक वो क्षमा जो कर दे,

घट घट ज्ञान से जो भर दे।

विष के वृक्ष पर चढ़ा के,

अमृत फल वहाँ से लादे।

मोती सागरों मे खोजे,

नित नए ज्ञान के लिये।

दियना.........

ईर्ष्या द्वेष मन से भूले,

पड़ गये प्रेम के है झूले।

कटुता जगह न बनाये,

क्षोभ मन के मिटाये।

राह सच की दिखाना,

गुरुवर ज्ञान के लिये।

दियना-------

सीमा मिश्रा,बिन्दकी,फतेहपुर