हिमाचल प्रदेश : भूस्खलन ने रोकी नदी की धारा, आसपास के गांवों के लिए खतरे की घंटी

हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में शुक्रवार को हुए भूस्खलन ने चंद्रभागा नदी के प्रवाह को रोक दिया है, जिससे वहां एक झील बन गई है जो कृषि क्षेत्रों और इलाके आसपास के गांवों में रहने वाले लगभग 2,000 लोगों के लिए खतरा बन गई है. हालांकि, अब तक किसी के हताहत या घायल होने की सूचना नहीं है.

जिला उपायुक्त नीरज कुमार ने कहा कि कल सुबह करीब 9.30 बजे पास की पहाड़ी का एक हिस्सा गिर गया, जिससे नदी पूरी तरह से अवरुद्ध हो गई. उन्होंने कहा कि स्थिति का जायजा लेने और उपाय सुझाने के लिए विशेषज्ञों की एक टीम मौके पर भेजी गई है.

भूस्खलन के एक छोटे से वीडियो में दिख रहा है कि एक खड़ी पहाड़ी का बड़ा हिस्सा मिट्टी, चट्टानों और अन्य मलबे के एक बड़े भार को लेते हुए चंद्रभागा नदी में गिर रहा है, इससे उसका मार्ग अवरुद्ध हो गया है. वीडियो में धूल के गुबार उठते और जमते दिखाई दे रहे हैं क्योंकि भूस्खलन नदी के एक हिस्से को कवर कर लेता है, जिससे पहाड़ी के किनारे एक बड़ा छेद हो जाता है.

पिछले कुछ हफ्तों में हिमाचल प्रदेश में कई भूस्खलन हुए हैं, जिससे कई लोगों की मौत हुई है. किन्नौर में बुधवार को हुए भूस्खलन में 15 लोगों के शव निकाले जा चुके हैं. इस हादसे में एक सरकारी बस समेत कई वाहन मलबे में दब गए थे. शिमला जा रही सरकारी बस में कथित तौर पर 40 लोग सवार थे.

NDRF और स्थानीय पुलिस की टीमों ने आज भी वहां बचाव कार्य फिर से शुरू किया है; कई लोग अब भी लापता हैं और अधिकारियों को आशंका है कि मलबे में कुछ और लोग दबे हो सकते हैं. इससे मृतकों की संख्या बढ़ सकती है.

राज्य के मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये और गंभीर रूप से घायलों को 50-50 हजार रुपये देगी. उन्होंने कहा कि मृत बस यात्रियों के परिजनों को परिवहन विभाग द्वारा एक लाख रुपये दिए जाएंगे और घायलों का मुफ्त इलाज कराया जाएगा. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इलाके का भूगर्भीय सर्वेक्षण भी करेगी.