हाँ नहीं देता कोई बधाई!

हाँ! नहीं देता कोई बधाई

नहीं देता प्रतिक्रिया कोई

संदेश चुभता बधाई का

मौन आत्मा की पीड़ा है।


त्योहारों पर खुश लोग 

पसंद नहीं मुझकों कभी

त्योहार कटु व्यंग्य सा

तमाचा मारता प्रतीत सा।


बचपन की कसक गंभीर

जीवन पर छाप अमिट

अश्रुपूरित नेत्र ज्योति मंद

मौन हो साकार लुप्त।


अस्त-व्यस्त जीवन में

बुझ जाती आशा हर बार

त्योहार कायर बना देता

मौन छा जाता हर बार।


परिचय - ज्ञानीचोर

शोधार्थी व कवि साहित्यकार

मु.पो. रघुनाथगढ़, सीकर राजस्थान।

पिन - 332027

मो. 9001321438