॥ सावन की फुहार ॥

सावन की आई फुहार हो

दादुर गाये है गीतवा

मेघा से बरसे फुहार हो

हरियाली छाया रे मितवा


चारों तरफ दिखे पानी ही पानी

नदियाँ तलाब में आई जवानी

किसानों में छाई खुमार हो

सावन की आई बहार हो

झींगुर गाये है गीतवा

मेघा से बरसे फुहार हो

हरियाली छाया रे मितवा


काली काली बदरिया

अँटरिया पे आये

बैरन पुरवईया

दुवरिया पे बुलाये

हरा भरा लागे संसार हो

हरियाली छाया रे मितवा

सावन की आई बहार हो

दादुर गाये है गीतवा


प्रकृति ने ओढ़ा

हरियाली का छाता

कीचड़ की लगाये

ललाट में टीका

चारों ओर बूंदों की बरसात हो

हरियाली छाया रे मितवा

सावन की आई बहार हो

दादुर गाये है गीतवा ।


उदय किशोर साह

मो० पो० जयपुर जिला बाँका बिहार

9546115088