कोशिश

अपनी कोशिश करते जाओ,

मंज़िल पथ पर बढ़ते जाओ,

हर रोज लोग तुम्हे मारेंगे थप्पड़,

तुम गाल सहला अनवरत आगे बढ़ते जाओ,

परेशानियों का काफिला आता रहेगा,

तुम मुस्कुराहट के सौदागर बन आगे बढ़ते जाओ,

बड़ा गहरा है सपनो का समंदर,

तुम लगा के गोता,

जीत का मोती निकाल लाओ,

गर डर गए मुश्किलों से और छोड़ दोगे रास्ता ,

तो क्या सम्मानित जीवन जी पाओगे,

अरे ! छोड़ो ये डर और आलस का हाथ,

वीरों की भांति कर्मक्षेत्र में उतर जाओ,

जीवन के हर कदम पर मुकाम खड़े करते जाओ।


-- इं.निशांत सक्सेना "आहान"

   गाजियाबाद