रिमझिम सालन

बरसे जब ये रिमझिम सावन,

हिय आस जगे प्रियतम आवन,

पींगें झूलों की छूलें नभ

अमिया पे वनप्रिय कूकें तब,

नवजीवन का संचार करें

हो मुकुलित मन का आँगन तब,

त्यौहार बने प्रतिदिन पावन

बरसे जब ये रिमझिम सावन...

घनघोर घटा घिर घिर आये,

शुष्क धरा मन की हर्षाये,

टप टप बूँदों का सुर नूतन

चंचल चितवन ये ललचाये 

हों राग मधुर चहुँ दिग् बावन,

बरसे जब ये रिमझिम सावन,...

रचना सरन,न्यू अलीपुर,कोलकाता