तैमूर की तरह मुगल बादशाह पर रखा सैफ-करीना ने छोटे बेटे का नाम

बाॅलीवुड के नवाब सैफ अली खान और करीना कपूर खान अकसर अपनी बच्चों को लेकर सुर्खियों में छाए रहते है। हाल ही में यह दोनों दूसरे बेटे के पैरेंट्स बनें जिसके नाम को लेकर फैंस काफी उत्सुक थे, वही इससे पहले खबर सामने आई थी कि करीना और सैफ ने अपने दूसरे बेटे का नाम 'जैह' रखा है वहीं अब जानकारी मिली है कि करीना-सैफ ने बड़े बेटे तैमूर की तरह ही दूसरे बेटे का नाम भी मुगल बादशाह पर ही रखा है। 

बता दें कि करीना-सैफ ने छोटे बेटे का नाम जहांगीर अली खान रखा है। इस बात की पुष्टि करीना के एक पारिवारिक सदस्य ने एक इंटरव्यू के दौरान की है। हालांकि उन्होंने ये भी बताया कि नाम की घोषणा केवल करीना और सैफ ही करेंगे।

सैफ अली खान और करीना कपूर खान के परिवार के एक प्रमुख सदस्य ने एक बातचीत में बताया कि बच्चा सैफ और करीना का है। ऐसे में नाम रखने का अधिकार भी उन्हीं को है। हमें न तो सैफ करीना के बड़े बेटे का नाम तैमूर रखे जाने पर कोई ऐतराज था और न छोटे बेटे का नाम जहांगीर रखने पर है।

उन्होंने बताया रि वैसे भी तैमूर के घर का नाम टिमटिम है, जो बड़ा ही खूबसूरत है। छोटे बेटे का घर का नाम जेह है। ऑफिशियली अब जहांगीर है। ऐसे में हमें इस नाम से भी कोई दिक्कत नहीं है। परिवार के सदस्य ने कहा कि सैफ जिस धर्म से ताल्लुक रखते हैं, उस धर्म का नाम रखने की उन्हें पूरी इजाजत और हक दोनों है। 

वहीं इससे  पहले  करीना  अपनी  किताब प्रेग्नेंसी बाइबिल के चलते सुर्खियों में थी वहीं इस नाम की पुष्टि भी इस किताब से हुई है। दरअसल, करीना-सैफ के छोटे बेटे का नाम का मामला तब सामने आया जब करीना की किताब प्रेग्नेंसी बाइबिल के पिछले पन्ने पर छोटे बेटे के फोटो के नीचे जहांगीर लिखा पाया गया। इसी से कयास लगाए जा रहे हैं कि छोटे बेटे का नाम जहांगीर है।

मुगल बादशाह अकबर के बेटे नाम  जहांगीर था जिसका दूसरा नाम सलीम भी था। बता दें कि जहांगीर एक पारसी शब्द है, जिसका अर्थ है दुनिया पर राज करने वाला। जहांगीर का असली नाम नूर-उद-दीन मोहम्मद सलीम था। जहांगीर का जन्म 31 अगस्त 1569 को हुआ था। जहांगीर ने 1605 से 1627 तक भारत देश पर राज किया। इससे पहले 1599 में जब अकबर अन्य युद्धों में व्यस्त था, तब उसने जहांगीर को अपना उत्तराधिकारी बनाया था। इसके बाद 1605 में जहांगीर की ताजपोशी उन्हें मुगल सम्राट बनाया गया। और 28 अक्टूबर 1627 को लाहौर यात्रा के दौरान उसकी मौत हो गई थी।