जेल की रोटियां बन्दी नहीं डेरी पर जानवर खा रहे

 - आखिर क्या वजह बनी रोटियां बेचने की 

अजय दुबे

कन्नौज। निजी डेरी संचालकों को बेच दी है जेल की रोटियां।जी हां हम बात करते है जिला जेल में बन्द बनदियो को दी जाने वाली रोटियों की । कन्नौज जेल में कैदियों को खाने में दी जाने बाली रोटियां बड़ी मात्रा में बच रही है जिन्हें परीसर में ही एक तरफ ढेर लगा कर कर सूखा दिया जाता है बढ़ी मात्रा में  होने के बाद उन्हें निजी डेरी संचालकों को बेचा दिया जाता है,यदि इन्हीं बची रोटीओ को सरकारी गौशालाओं में भूखे गौ वंश को खिलाया जाए तो भूख से मरने बाली गायो एब गौ वंश को बचाया जा सकता है।

  शाशन द्वारा संचालित गौशालाओं में अफसरों की गलत नीतियों के बजह से ही अन्ना पशु मर रहे जबकि जेलों में तमाम अन्न की बर्बादी हो रही है जिस ओर किसी का ध्यान नही जा रहा अफसर खुद की जेब मोटी कर खुद माला माल हो रहे है,उदाहरण है जिला कारागार पर मंगलवार की सुबह एक ट्रैक्टर ट्राली में झाल में भरी रोटियां निकल रही थी।जानकारी करने 

 पर पता चला यह रोटियों को निजी डेरी संचालक अपने जानवरो को खिलाने के लिए ले जा रहा है हर सप्ताह 5से 7 कुंतल तक रोटियां जेल पर बच रही है।जेल सूत्रों की माने तो इससे मोटी रकम में बेच दिया जाता है और इनसे मिलने बाले पैसे को कहि दर्शया भी नही जाता।

इधर पूछने पर जेल अधीक्षक  ने बताया कि इन्हें बेचा नही जाता बल्कि बदले में डेरी संचालक द्वारा गोबर की खाद भेजी जाती है। जिसकी जानकारी जिलाधिकारी राकेश कुमार मिश्रा को भी है यह बात जेल अधीक्षक ने फोन पर हमारे पत्रकार को दी ।