आजादी की खुशबू

यह फिजाओं से जो 

आजादी की खुशबू आ रही है

कितने वीरों की शहादत 

की ये गाथा गा रही है?

है विरासत में मिली तुझको 

यह आजादी अगर ,

तज के सारे स्वार्थ जां से 

बढ़ के इस से प्यार कर,

देश में गद्दारों की संख्या 

क्यों बढ़ती जा रही है?

कितने वीरों ने शहादत की 

ये गाथा गा रही है?

देख लो तुम इस तिरंगे को 

नमन इसको करो,

भारती मां के चरण में 

शीश अपना तुम धरो,

हो गए क्यों देश द्रोही 

भारती शरमा रही है?

कितने वीरों की शहादत की 

ये गाथा गा रहा है?

देश का गौरव बढ़ाओ 

सत्य पथ पर चलो,

आंधियां रस्ता जो घेरे 

तुम भी तूफां में ढलो,

वीरों की कुर्बानियां रस्ता 

तुझे दिखला रहीं हैं।

कितने वीरों की शहादत की 

ये गाथा गा रही हैं

ये फिजाओं से जो आजादी 

की खुशबू आ रही है।

कितने वीरों की शहादत की 

ये गाथा गा रही है?


मीनेश चौहान 'मीन',वरिष्ठ गीतकार 

कवयित्री व स्वतन्त्र लेखिका,ग्राम-राई,

पोस्ट-खंडॉली फर्रुखाबाद-उ0प्र0,

9129399622