सेल्युलर जेल आज भी सुनाती है दास्ताँ

                                              

15 अगस्त का दिन था जब भारत हुआ था आज़ाद

सोने की चिड़िया को गोरों ने बहुत किया था बर्बाद


हिंदुस्तानियों को बहुत सज़ा देते थे समझते थे गुलाम

अच्छा ओहदा कोई नहीं था देते थे छोटे मोटे काम


भगत सिंह राजगुरु सुखदेव आज़ाद हैं कितने ही नाम

जिन्होंने अंग्रेजों का जीना कर रखा था हराम


जलियांवाला बाग में लोगों की लाशों से भर गया था कुआं

आग फैल गई पूरे भारत में उठने लगा आज़ादी का धुआं


बिना हथियार के आज़ादी की लड़ाई की आई फिर आंधी

हिंदुस्तान में चमका एक सितारा जो था महात्मा गांधी


सत्य और अहिंसा के दम पर बिना हथियार वो लड़े

वतन पर कुर्बान होने को सीना तान थे सब खड़े


मतवाले देशभक्त भारत माता को आज़ाद कराने चल दिये

यातनाएं बहुत सही अडिग रहे जेलों में बंद किये


बेड़ियों में जकड़े थे मेरे देश के आज़ादी के मतवाले

जवानी में पी गए वो देश के लिए कुर्बानी के प्याले


अंडेमान की सेल्युलर जेल आज भी उनकी सुनाती है दास्ताँ

काल कोठरियों में ज़िन्दगी जिन्होंने गुज़ारी थी जहां


आज भी उनकी आत्मा वहां रोज रात को आती होगी

अंग्रेजों के अत्याचारों की कहानियां सुनाती होंगी


बहुत लगाया ज़ोर सबने कुर्बानियां देकर यह आज़ादी पाई

खुल गई जंज़ीरें भारत माता की सबने मिल दिवाली मनाई


रवींद्र कुमार शर्मा

घुमारवीं

जिला बिलासपुर हि प्र