राधा के गोपाल

मैया के तो भाग्य का,था अनंत विस्तार।

कृष्ण-कन्हाई आपने,फैलाया उजियार।। 

लीलाएँ अद्भुत करीं,पूज रहा संसार।

राधा के गोपाल ने,परे किया अँधियार।।

बहुत सताया मातु को,भाया नटखट रूप।

सारे जग में खिल रही,परम ज्ञान की धूप।।

द्वापर तो अभिभूत हो,करता तुमसे प्यार।।

राधा के गोपाल ने,परे किया अँधियार।।

अँधियारा तुमसे डरा,जगमग सारा लोक।

 गिरिधर तुमने कर दिया,परे सभी का शोक।।

हर नफ़रत को दूर कर,बाँटा तुमने प्यार।

राधा के गोपाल ने,परे किया अँधियार।।

पाप मारकर,धर्म का,रक्खा तुमने मान।

नंदलाल तुम तो बने,नारी का सम्मान।।

नटनागर तुम साँच हो,विष्णूुदेव- अवतार।

राधा के गोपाल ने,परे किया अँधियार।।

मुरलीधर तुम शुभ सदा,देते हो आशीष।

रहे आपकी नित दया,ना झुक सकता शीश।।

मधुसूदन तुम चेतना,हो पूरा संसार।

राधा के गोपाल ने,परे किया अँधियार।।

                  -प्रो(डॉ)शरद नारायण खरे