ऑल टाइम हाई पर पहुंचने के बाद इस सप्ताह घटा विदेशी मुद्रा भंडार

नई दिल्ली। देश का विदेशी मुद्रा भंडार 13 अगस्त, 2021 को समाप्त सप्ताह में 2.099 अरब डॉलर घटकर 619.365 अरब डॉलर रह गया. भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को अपने ताजा आंकड़ों में बताया कि इस गिरावट की वजह विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (एफसीए) में आई गिरावट है. इससे पहले सप्ताहांत में विदेशी मुद्रा भंडार 88.9 करोड़ डॉलर बढ़कर 621.464 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्चतम स्तर को छू गया था.

रिजर्व बैंक के साप्ताहिक आंकड़ों के मुताबिक, समीक्षाधीन सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट आने की वजह विदेशी मुद्रा संपत्तियों (एफसीए) का घटना था जो समग्र भंडार का प्रमुख घटक है. इस दौरान एफसीए 1.358 अरब डॉलर घटकर 576.374 अरब डॉलर रह गया. डॉलर के लिहाज से बताई जाने वाली विदेशी मुद्रा संपत्तियों में विदेशी मुद्रा भंडार में रखी यूरो, पाउंड और एन जैसी दूसरी विदेशी मुद्राओं के मूल्य में वृद्धि या कमी का प्रभाव भी शामिल होता है. आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान स्वर्ण भंडार 72 करोड़ डॉलर घटकर 36.336 अरब डॉलर रह गया.

वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष के पास मौजूद विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 70 लाख डॉलर घटकर 1.544 अरब डॉलर रह गया. रिजर्व बैंक ने बताया कि आलोच्य सप्ताह के दौरान आईएमएफ के पास मौजूद भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 1.4 करोड़ डॉलर घटकर 5.111 अरब डॉलर रह गया.

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए विदेशी मुद्रा भंडार बहुत जरूरी है. आर्थिक जानकारों का कहना है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया शेयर बाजार में आ रहे पैसे और एफडीआई को लगातार अपने कंटिजेंसी फंड में जमा कर रहा है. कोरोना संकट के बीच देश की अर्थव्यवस्ता के लिए यह जरूरी है. अगर आरबीआई के पास पर्याप्त भंडार होगा तो क्रेडिट रेटिंग पर सकारात्मक असर होगा और इससे निवेशकों की धारणा भी मजबूत होगी. भारतीय अर्थव्यवस्था इस समय निवेशकों को खुली बाहों से स्वागत कर रही है.

इस समय भारत 15 महीने तक आयात करने में सक्षम है. जापान के पास 22 महीने का भंडार है. भारत के पास विदेशी मुद्रा भंडार चीन, जापान, स्विटजरलैंड और रूस के बाद सबसे ज्यादा है. स्वीटजरलैंड के पास 39 महीने तक आयात करने की क्षमता है. आर्थिक जानकारों का कहना है कि कोरोना संकट से जब देश की इकोनॉमी बाहर निकलेगी तो आयात में तेजी आएगी और उस समय के लिए यह फंड बहुत जरूरी है.