चार बुंदेलियों पर एक गोवंश फिर भी अन्ना

बांदा। गोवंश से चार गुना ज्यादा आबादी वाले बुंदेलखंडी गो माता के प्रति लापरवाह हैं। चार बुंदेलियों पर एक गोवंश का औसत है। इसके बाद भी पूरे बुंदेलखंड में अन्ना प्रथा चरम पर है। जिसे मां के नाम से पुकारा जाता है उस गोमाता को अन्ना से जाना जा रहा है।प्रदेश की तुलना में बुंदेलखंड में मात्र 12 फीसदी ही गोवंश हैं। पिछली पशु गणना के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में गोवंशीय पशुओं की संख्या 1,95,57,067 है, जबकि बुंदेलखंड के सातों जिलों बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा, जालौन, झांसी और ललितपुर में 23,50,882 गोवंश हैं।

 यह 12.2 फीसदी हैं।सबसे ज्यादा 4,83,033 गोवंश ललितपुर जिले में हैं। धर्मनगरी चित्रकूट जनपद में गोवंशों की संख्या 4,21,332 है। दूसरी तरफ बुंदेलखंड की जनसंख्या 96,81,552 (वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक) है। मौजूदा समय में आबादी का आंकड़ा एक करोड़ से भी ज्यादा हो गया है।बुंदेलखंड में प्राचीन समय से ही गोवंश पालने की प्रथा रही है। खासकर ग्रामीण इलाकों में शायद ही कोई घर ऐसा हो जहां गाय-भैंस न हों, लेकिन पिछले कुछ दशकों से इस परंपरा में बड़ा बदलाव आया है। बुंदेलखंडी गोवंश को घाटे का सौदा मान बैठे हैं।

हालांकि, इसके पीछे खेती की दुर्दशा और अक्सर आ रहीं दैवी आपदाएं भी कारण हैं। इन परिस्थितियों का सबसे ज्यादा खामियाजा गायों को भुगतना पड़ रहा है। भैंस और बैल की स्थिति ठीक है।बुंदेलखंडियों का सबसे ज्यादा पसंदीदा पशु गोवंश ही है। इसके बाद भेड़, बकरी, घोड़े, टट्टू और सुअर हैं। मुर्गी पालन के प्रति रुझान कम है। गोवंश की संख्या 23,50,882 है, जबकि भेड़, बकरी, घोड़े आदि 17,68,997 हैं। मुर्गी, बतख आदि की संख्या 7,29,138 है।प्रदेश के सापेक्ष बुंदेलखंड में गोवंशीय 12.2 प्रतिशत, महिषवंशीय 5.15 प्रतिशत, भेड़, बकरी, घोड़े आदि 9.60 प्रतिशत, मुर्गी 3.91 प्रतिशत और अन्य पशुधन 5.31 प्रतिशत हैं।

अन्ना पशु की सड़कों पर भरमार है। दूसरी तरफ पशुपालन विभाग इन्हें गोशालाओं में संरक्षित बताकर करोड़ों रुपये का चारा-भूसा खिलाने का खेल खेल रहा है। बीते 28 माह में चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों बांदा, हमीरपुर, चित्रकूट और महोबा में गोशालाओं में पशुओं के भरण-पोषण पर 58 करोड़ 92 लाख 37 हजार रुपये खर्च हुए हैं।

बांदा जिले में 26 करोड़ सात लाख, चित्रकूट जिले में आठ करोड़ 94 लाख, महोबा जिले में 12 करोड़ 70 लाख और हमीरपुर जिले 11 करोड़ 13 लाख रुपये खर्च बताया गया है।चित्रकूटधाम मंडल में पशुपालन विभाग के कागजी आंकड़ों के मुताबिक, 1,29,385 पशु गोशालाओं में संरक्षित हैं। इनके अलावा चारों जनपदों में 8615 अन्ना पशुओं को किसानोंध्ग्रामीणों की सुपुर्दगी में सौंपा गया है। इसमें हमीरपुर जिले 3477, महोबा जिले में 2447, बांदा जिले में 561 और चित्रकूट जिलेमें 2130 अन्ना गायें शामिल हैं।