तेरा ख्वाब

चाहते है की अहसास मन के लिखें,

प्रेम की प्यास पीड़ा जतन से लिखें।

मन के द्वारे पे पहरे बिठाए है हम।

कैसे ख्वाबों को अपने अमन से लिखें।

आपको देखकर जी रहे अब भी हम,

आपके दर्द को पी रहे अब भी हम,

जानते है की सूरज हो आकाश के,

राह तकते तुम्हारी सजन अब भी हम।

नयनों में आपकी कैद तस्वीर है,

सांसों के संग बांधी ये जंजीर है,

ख्वाब में आप यदि मुस्कुरा देते हो,

खिलखिला उठती मेरी ये तकदीर है।

हाथ फैले तुम्हारी दुआ के लिए,

हम जुदा हो गए हैं सदा के लिए,

जानते हैं की तुम बिन न जी पाएंगे,

मरके भी जी रहे हैं सजा के लिए।

थाह लेने लगे आज धीरज की हम,

आंख होने लगी फिर खुशियों से नम,

जानते है की तुम बिन खुशियां कहां,

खोज लाए हैं फिर तेरे ख्वाबों को हम।

सीमा मिश्रा,बिन्दकी,फतेहपुर-उत्तर प्रदेश