हरियाली तीज पर देंगे बांके बिहारी स्वर्ण सोने चांदी से निर्मित हिडोले में विराजमान होकर दर्शन

मथुरा। जब पूरे भारतवासी देश को आजाद होने का जश्न मना रहे थे। उस वक्त वृंदावन के सुप्रसिद्ध बाँकेबिहारी और उनके भक्तों ने भी आजादी का जश्न भक्ति और श्रद्धा के साथ मनाया। जहां देशवासी खुशी से झूम रहे थे वहीं बाँके बिहारी के एक भक्त ने उन्हें स्वर्ण जड़ित हिंडोला अर्पित किया और पहली बार ठा. बांकेबिहारी 15 अगस्त 1947 को स्वर्ण हिंडोला में विराजमान हुए। इसलिए ठा बांकेबिहारी महाराज और देश की आजादी मिलने पर पहले स्वतंत्रता दिवस के बीच गहरा संयोग है।कलकत्ता के मारवाड़ी सेठ और ठा. बाँकेबिहारी के अनन्य भक्त सेठ हरगूलाल ने जन-जन के आराध्य बांकेबिहारी महाराज के लिए 20 किलो सोना और 100 किलो चांदी से जड़ित विशाल हिंडोला बनवाया। काबिले गौर बात यह है कि आज से 74 साल पहले ठा. बांकेबिहारी महाराज के हिंडोला के साथ ही बरसाना में राधारानी मंदिर में विराजमान श्रीजी के लिए भी चांदी और सोने का हिंडोला बना था। जिसमें बाँकेबिहारी मंदिर में ठाकुरजी और बरसाना के राधारानी मंदिर में श्रीजी सावन माह में प्रतिवर्ष विराजमान होते हैं।वृंदावन के ठा. बांकेबिहारी भी उसी दिन श्रावण मास की हरियाली तीज तिथि के अवसर पर सोने व चांदी से बने अनुपम हिण्डोलों प्रतिवर्ष विरजमान होकर भक्तों को दर्शन देते हैं। कलकत्ता निवासी और ठाकुरजी के अनन्य भक्त सेठ हरगुलाल बेरीवाला ने स्वतंत्रता दिवस से कुछ दिन पूर्व ही ये हिण्डोले मंदिर प्रशासन को भेंट किए थे। जिन्हें हरियाली तीज के अवसर पर ठाकुरजी की सेवा में प्रयोग किया जाना था और उस दिन संयोग से 15 अगस्त था। ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में हरियाली तीज महोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में है। मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है विदेशी फूल चार चांद लगाएंगे वहीं मंदिर की भव्य झिलमिल प्रकाश व्यवस्था लोगों को अपनी ओर आकर्षित करेंगी। बांके बिहारी साल में हरियाली तीज व अक्षय तृतीया पर बाहर विराजमान होकर भक्तों को चरण दर्शन देते हैं।