ज़ुल्म के खिलाफत का दरस देती है कर्बला

जौनपुर। हर मुसलमान का फरीज़ा है दुनिया में जहां कहीं भी ज़ुल्मों सितम हो उसके खिलाफ आवाज़े एहतेजाज बुलंद करे। मौलाना सैय्यद अली यासिर रिजवी ने मदरसा इमामे जाफर सादिक  मे मजलिस को खिताब करते हुए कहा मोहर्रम अज़ादारीए सैय्यद शोहदा सिर्फ  शियों से मखसूस नहीं बल्कि दुनिया का हर बा ज़मीर आदमी इमाम हुसैन का गम मनाता है मुहर्रम उल हराम एक तहरीक है और यह कयामत तक जारी रहेगी सैय्यदुशोहदा ने कर्बला के मैदान में कुर्बानी देकर इस्लाम को बचा लियाॉ अगर इमामे हुसैन ने कर्बला में अपने जिगर के पैरों को राहे खुदा में कुर्बान ना किया होता तो आज इस्लाम का नामोनिशान ना होता, कर्बला का सबसे बड़ा दरस ज़ुल्म और ज़ालिम से मुकाबला करना है- मौलाना ने कहा कि अजादारीऐ इमामे हुसैन अ.स का अहम दरस यह है कि हमें भी अपने माशरे को ऐसा माशरा बनाना चाहिए जैसा इमाम हुसैन चाहते हैं, कर्बला की जंग ज़ुल्मो सितम के खिलाफ थीॉ जिस तरह फिरौन से जनाबे मूसा ने मुकाबला कर के पतह हासिल की उसी तरह इमामे हुसैन ने यज़ीद को इस तरह नीस्तो नाबूद कर दिया के अब कोई यज़ीद कयामत तक किसी हुसैन से बैएयत तलब नहीं कर सकता आखिर में मौलाना ने शबीहे रसूल जनाबे अली अकबर की शहादत के अलमनाक पहलू पर रौशनी डाली।