नीरज चोपड़ा

सरसिज समान सुशोभित'नीरज'ने रच डाला इतिहास,

121 साल के सपने को इस नवयुवक ने किया साकार।


भाला फेंक कर किया भारत माँ का प्रदिप्त भाल,

चहुँ ओर लहराया तिरंगा प्यारा,कर दिया कमाल।


हरियाणा के पानीपत में जन्मा भारत माँ का लाल,

इतिहास परायण धरती का बन बैठा सोने का लाल।


2012 में जूनियर चैंपियन गोल्ड लिया,

2018 में जकार्ता में एशियन गेम्स में स्वर्ण लिया।


पूत के पाँव तब पालने में ही दिख गये थे,

होनहार वीरवान है ये सब समझ गये थे।


जीत दिलायी टोक्यो ओलंपिक में ,गर्व से हुआ ऊँचा सर,

निज नाम की भाँति जब खिलकर दिखाया तुमने असर।


हो जब जज़्बा दिल में तो मंज़िल नहीं होती है दूर,

नीरज सम जो लक्ष्य को देखे,जीत नहीं फिर सुदूर।


यूँ ही लहराये तिरंगा हमारा,गुंजित हो वसुधैव कुटुंबकम नारा,

नीरज तुमने दिया हम सबको सौगात है प्यारा।


बनके सूरज चाँद तुम चमको,हर कामयाबी मिले तुमको,

उत्तुंग शिखर पर ध्वजा लहराओ,देश की तुम शान बढ़ाओ।


रीमा सिन्हा (लखनऊ)