सपनों की हकीकत

                                     

मेरे काल्पनिक सपनों की हकीकत दुनिया हो तुम

मेरे काल्पनिक मन की तस्वीर की मूर्तरूप हो तुम

मेरे कल्पनाओं में पिरोये गहनों की हकीकत मोती हो तुम

मेरे काल्पनिक धड़कन की जीवन्त दुनिया हो तुम।


मेरे काल्पनिक शीतल झरनों की हकीकत धारा हो तुम

मेरे काल्पनिक सपनों की स्पर्श मात्र की हकीकत शीतलता हो तुम

मेरे काल्पनिक झरनों की गंतव्य मार्ग हो तुम

मेरे काल्पनिक सपनों की हकीकत दुनिया हो तुम।


मेरे काल्पनिक रंगों की हकीकत इंद्रधनुष हो तुम

मेरे काल्पनिक सावन की उन्मादी बून्द हो तुम

मेरे काल्पनिक चकोर की हकीकत चाँद हो तुम

मेरे काल्पनिक सपनों की हकीकत दुनिया हो तुम।


मेरे काल्पनिक बसंत की हकीकत मकरंद हो तुम 

मेरे काल्पनिक बगिया की लहराती खिली फूल हो तुम

मेरे काल्पनिक कोयल की हकीकत मीठी स्वर हो तुम

मेरे काल्पनिक सपनों की हकीकत दुनिया हो तुम।


मेरे काल्पनिक टिमटिमाते तारों की एक मात्र ध्रुव तारा हो तुम

मेरे काल्पनिक प्रकाश की शीतल दुधिया चाँद हो तुम

मेरे काल्पनिक डर के अंधेरे को मिटाने वाली प्रकाशपुंज हो तुम

हाँ मेर काल्पनिक सपनों की हकीकत दुनिया हो तुम।


--- सिकन्दर कुमार

भटवलिया , जनता बाजार 

     छपरा , बिहार