चिकित्सीय जीवन आमजन की सोच और चिकित्सा का व्यवसाय करण

संसार का हर प्राणी किसी दैवीय शक्ति की वजह से धरा पर जन्म पाता है ।फिर चाहे वह पशु ,पक्षी हो मानव हो या विशालकाय डायनासोर हो या अति सूक्ष्म विषाणु सभी किसी शक्ति के कारण धरा पर आते हैं। व अपना कार्यकाल पूर्ण करते हैं जिस  के कारण हम जीवन पाते हैं वह भगवान ईश्वर प्रभु दीनानाथ करुणानिधान आदि कई नामों से पुकारा जाता है बल्कि अपने प्राणियों की रक्षा के लिए अवतार रूप में धरती पर जन्म लेकर त्रस्त प्राणियों की रक्षा भी करते हैं ।अर्थात हम यह कह सकते हैं कि वह प्राणियों को बचाते हैं जीवन देते हैं इसीलिए भगवान कहे जाते हैं।

 इसी तरह चिकित्सक भी धरती के भगवान कहे जाते हैं क्योंकि यह भी मानव को रोग मुक्त करते हैं उसके प्राणों की रक्षा करते हैं अहर्निश बिना किसी भेदभाव के अपना कार्य करते हैं मौसम कैसा भी हो यह अपने कार्य को पूर्ण करते हैं इन्हीं चिकित्सकों के लिए आमजन की सोच में वर्तमान में बदलाव आ रहा है परंतु कुछ प्रसिद्ध डॉक्टर से मिलने के बाद यह जाना कि जिनको हम सिर्फ व्यवसायी समझने लगे हैं असलियत में उनका जीवन आम लोगों के संघर्षी जीवन से ज्यादा संघर्षमय होता है दिन-रात मरीजों की सेवा में लगे रहना कोई भी मौसम हो अपने कार्यस्थल को नहीं छोड़ना ।

अपने एक 1 मिनट में कई जिंदगियां बचाते हैं इनके लिए समय का हर क्षण मूल्यवान होता है इनका जीवन काफी कठिन होता है पारिवारिक कार्यक्रमों में नहीं जा पा ना अपने परिवार को समय नहीं दे पा ना कई बार तो अपने बच्चों तक को नहीं देख पा ना इनके जीवन में ऐसा कई बार होता है कई बार खाने की थाली पर से भी इन लोगों को उठना पड़ जाता है ।

कोटा के प्रसिद्ध न्यूरो सर्जन डॉक्टर  का कहना है कि कोई भी डॉक्टर व्यवसाय के तौर पर अपनी चिकित्सा यात्रा का प्रारंभ नहीं करता है कभी-कभी समय व परिस्थितियां ऐसा करवा देती है अगर एक डॉक्टर पर व्यवसायी होने का ठप्पा लगता है तो कहीं ना कहीं समाज समय सरकार भी दोषी होती है सरकारी अस्पतालों में अव्यवस्थाओं का दोषी डॉक्टर को मान लिया जाता है वह उनके साथ अभद्रता का व्यवहार भी कर दिया जाता है ऐसे में भगवान समझे जाने वाला डॉक्टर भी इंसान बन जाता है ।

हमारे द्वारा अपना जीवन मरीजों की सेवा को अर्पित किया जाता है आजीविका के लिए हमें भी धन की आवश्यकता होती है लेकिन आमजन हमें लोभी ही समझ लेता है यह लोग कभी कोई त्यौहार कोई कार्यक्रम कभी खुशी या किसी भी गम में शामिल नहीं हो पाते हैं ।और मरीजों की सेवा के लिए हरदम तैयार रहते हैं।   कहते  हैं कि एक बार जब ये अपने काम से ज्यादा बिजी थे और बिल्कुल थक गए थे तो इनके पुत्र के द्वारा इन्हें कहा जाता है कि पापा  आपको तो मरीजों की सेवा करके उन्हें देखकर ही पुण्य प्राप्त हो जाता है ।तो आपको इस प्रकार से थका हुआ नहीं होना चाहिए ।

कोटा के कई डॉक्टर  से मिलने के बाद उनके निजी अनुभव के बाद हमें इनकी परिस्थितियों को भी समझना चाहिए यह भी अपना फर्ज निभाते हैं ।

आम जन को भी अपना कर्तव्य निभाना चाहिए तभी डाक्टर मरीजों के रिश्तो में मिठास आ सकती है।

 चिकित्सक व आमजन की सोच इन्हीं चिकित्सकों के लिए आमजन की सोच में वर्तमान में बदलाव आ रहा है जो चिकित्सक व रोगी के संबंध के मध्य दीवार खड़ी कर रहा है जहां वर्तमान में चिकित्सा का व्यवसायीकरण बढ़ता जा रहा है चिकित्सकों में मानव सेवा की जगह कमाई ने जोर पकड़ा है वह रोगी को  एक ग्राहक की तरह देखते हैं अनावश्यक दवाइयां जो परिवार पर बोझ तो बनती है कई बार रोगी के जमीन घर जेवर भी दिखा देती है यह सही है कि सभी को आजीविका के लिए धन की आवश्यकता होती है लेकिन उस धन के लिए किसी की जमीन भी बिक जाए तो रोगी के दिल से दुआ की जगह बद्दुआ ही शायद निकल जाए ।कई जगह तो रोगी को देखा भी नहीं जाता है जब तक निश्चित राशि जमा नहीं करा दे ।

तड़पता रहता है या अपने प्राणों से हाथ धो बैठता है तो फिर डॉक्टर कहां जाने वाला भगवान उस समय भगवान कहां रह जाता है उस समय वह जान बचाने वाला साधारण इंसान तक भी नहीं रहता है। इससे ज्यादा हद तब होती है जब अपना सब कुछ लुटाने के बाद भी अपने परिजन को नहीं बचा पाते हैं और अस्पताल वाले तब तक मृत देह भी परिजनों को नहीं देते हैं जब तक बकाया राशि जमा नहीं हो जाती है ।और ऐसे उदाहरण एक या दो नहीं सैकड़ों की तादात में निजी चिकित्सालय में देखे जा सकते हैं 

अगर रोगी सरकारी अस्पताल में जाता है तो प्रक्रिया इतनी जटिल होती है कि इलाज शुरू होने से पहले ही दम तोड़ देता है अखबार ऐसी कई बार ऐसी घटनाओं से भरे होते हैं यह व्यवस्था पर लापरवाही के चलते मरीज की जान चली गई अस्पताल के दरवाजे पर बच्चे का जन्म घटनाएं शर्मनाक हैं और अगर जान बचाने वाला भी कर्तव्य से मुंह मोड़ सिर्फ।पैसा बनाने में लग जाए तो एक डॉक्टर व व्यापारी में कोई अंतर नहीं रहेगा ।

अपनी इन्हीं गतिविधियों के कारण वर्तमान में भगवान कहे जाने वाले डॉक्टरों के सम्मान में आमजन की सोच में गिरावट आई है उनकी सोच में डॉक्टर सेवा से ज्यादा अपनी कमाई पर ध्यान देता है इसके उदाहरण कमीशन वाली जगह पर जांच करवाना कमीशन की दवा लिखना आदि-आदि ।

चिकित्सा एक ऐसा पेशा है जो मानव सेवा से जुड़ा है अगर चिकित्सक इसे व्यवसाय न बना कर कुछ अंशों में मानव सेवा भी करें तो वाकई में चिकित्सक मही के भगवान थे और रहेंगे ।

गत 2 वर्षों से कोरोना काल में भी कुछ चिकित्सकों ने अपने फर्ज को बखूबी निभाया वहीं कुछ ने तड़पते रोगियों के उनके हाल पर छोड़ दिया था बिगड़ती व्यवस्थाओं की बेरुखी ने कई बार जन आक्रोश का रूप धारण कर लिया था ।

अतः चिकित्सकों को अपना दायित्व भी समझना चाहिए वह अपने धर्म को पैसा नहीं बनाना चाहिए आम व्यक्ति जहां चिकित्सीय जीवन शान और शौकत व कमाई से प्रभावित होता है वह उसके जैसे जीवन की आशा करता है वही इन्हीं डॉक्टर का निजी जीवन भी पूर्ण मानव को ही समर्पित होता है जो रात दिन अपने घर वालों को छोड़कर मरीजों की देखरेख में रहते हैं अपने जीवन की आधी रात आधे दिन अस्पतालों में गुजार देते हैं। 

जैसे एक सैनिक सीमा पर देश की रक्षा करता है वह दिन रात नहीं देखता उसी प्रकार रोगी के लिए डॉक्टर के द्वारा दिन-रात नहीं देखा जाता है इन्हीं इन्हीं डॉक्टरों के निजी अनुभव जो शायद हम नहीं देख पाते हैं हमें वह भी देखना चाहिए जिस प्रकार एक आम इंसान अपना कार्य पूर्ण कर शाम को अपने घर आता है परिवार के साथ बैठता है शायद यह जीवन डॉक्टर बहुत कम जी पाते मेरे निजी जीवन का अनुभव है कि जब एक डॉक्टर ने खाना अधूरा छोड़ मेरे व मेरे गर्भ में पल रहे शिशु के प्राणों को बचाया था ।

एक अन्य उदाहरण जहां बिना किसी अग्रिम राशि को जमा करवाए बिना तुरंत इलाज आरंभ किया गया था ऐसे बहुत सारे उदाहरण भी हमें देखने को मिल जाते हैं ऐसे में हमें चिकित्सकों का आदर करना चाहिए उनका सम्मान करना चाहिए और उन्हें श्रद्धा की नजर से देखना चाहिए  ।


कवियत्री- गरिमा राकेश गौतम 

कोटा- राजस्थान