प्रेम भरी पाती

प्रेम भरी पाती

वो संग दिया और बाती

याद आई अंधेरी रात

मे बने जगमगाते तारें बाराती।।


वो प्रेम भरी पाती...


वो शबनम की गिरती बूंदे मुस्काती

वो कलम भी स्याही भर शर्माती

वो शब्दों के भंवर जाल मे उलझ जाती

वो प्रेम की पाती....


वो भिनी हवा भी गेसूओं को सहलाती

वो तरूवर पे लिपटी लता गुनगुनाती

ऐसे मे आभास सनम मेरे मन को तेरा

कैसे देख दिल मे उमंग जगाती।।


लिखने बैठी जो शब्द लड़खड़ाऐ

जज़्बात समेट मैं पाती पे सजाती

आंखों मे बसा तेरी तस्वीर और तुझे

महसूस कर वीना पत्र लिखते जाती।।


वो प्रेम की पाती...हाय

वो प्रेम की पहली पाती।।


वीना आडवानी"तन्वी"

नागपुर, महाराष्ट्र