पंचातत्व मे मिल जाऐगा

सत्य कर्म कर ले बंदे

पुण्य कुछ कमाऐगा

एक ना एक दिन तो तू

पंचतत्व मे मिल जाएगा।।


पैसा कमा जितना भी तू

साथ ना ले जा पाऐगा

मधुर स्वभाव रख सबसे

तेरा नाम ही गाया जाऐगा।।


ना दिल दुखा किसी का भी

पाप का भागिदार कहलाऐगा

सेवा भाव कर सार्थक कर जीवन

भग्वान का प्रिय बन जाऐगा।।


इन्हीं सत्कर्मों संग अपना खाता

भरा खुदा के पास तू पाऐगा।

दिखता नहीं चाहे प्रभु किसी को

पर उसकी नजरों से कोई न बच पाएगा।।


पंचतत्व से बना ये शरीर

पंचतत्व मे ही मिल जाऐगा

सोच समझ के कर्म कर बंदे

इंसानियत दिखा मान कमाऐगा।।


इसी प्रभु के लेखे जोखे के

आधार पर सुन इंसा।।

तू पुन: जीवन सुंदर पाके

धरा पे खिलखिलाएगा।।


वीना आडवानी"तन्वी"

नागपुर महाराष्ट्र