शिव की महिमा

शिव की महिमा अपरम्पार

शिव है दया का अतुल भंडार

शीश पर धर कर भागीरथी धार

कहलाते है गंगाधर भोले अपार

देवता-असुरों ने मिल 

मथ डाला समुद्र विशाल

चौदह रत्नों का निकला अतुल्य भंडार

विष लेने को ना हुआ कोई तैयार

नीलकंठ ने गरल को कंठ में लिया धार

आता जब उनको क्रोध अपार

त्रिलोचन तांडव करते धुआँधार

तीसरा नेत्र खोल करते विनाश

देवता के मनाने से हो जाते शान्त

दाँए रवि बाँए मंयक पावन धर

कालों के काल जय महाकालेश्वर

सती विरह में जन्म सफल कर

पार्वती संग हो गए अर्द्धनारीश्वर

हे त्रिपुरारी मिटाओ पाप

भवसागर से कराओ पार

धरती पर पाप बहुत है

तुम आकर करो उद्धार


अरुणा कुमारी राजपूत 'राज',स0अ0,

आदर्श अंग्रेजी़ माध्यम संविलयन विद्यालय, 

राजपुर,वि0ख0-सिंभावली,हापुड़-उ० प्र०